27 September, 2009

ब्लॉगवाणी करता है पक्षपात ख़ास ब्लोगरों के साथ: सबूत भी हैं

हरेक ब्लॉगर की आंखों का तारा ब्लॉगवाणी करता है पक्षपात! चौंकिए मत। ये सच है।

सबूत के तौर पर आज रात 11:12 तक ब्लॉगवाणी में इस वक्त सबसे उपर चल रहे खुशदीप सहगल के ब्लॉग पर ब्लॉगवाणी पसंद पर क्लिक कर अपनी पसंद दर्ज कराने की कोशिश कीजिए। जवाब मिलेगा कि आप अपना वोट पहले ही दर्ज करा चुके हैं!!

यहाँ सिलसिला नजर में आया था तब, जब पंगेबाज के नाम से जाने वाले ब्लॉगर को दिनेशराय द्विवेदी जी ने कथित रूप से अनुचित ईमेल भेजी थी और उसके बाद के घटनाक्रमों के कारण द्विवेदी जी के ब्लोगों पर ब्लॉगवाणी पसंद पर क्लिक किए जाने पर अंकों का बढ़ना रोका गया था। इसमें भी उनकी टापू पर आग वाली पोस्ट का खासा जिक्र हुया था। उस समय तो द्विवेदी जी ने ब्लॉगवाणी पसंद के चित्र के ऊपर ही लिख दिया था की यहाँ क्लिक करने का कष्ट ना करें, यह संख्या बढेगी नहीं!! बाद में उन्होंने उसे हटा लिया था।

यही नहीं, कुछ खासा विचारधारा की ब्लॉग पोस्टों की पसंद अप्रत्याशित रूप से बढ़ती रहती है, जबकि उसी समय पर आई अन्य पोस्टों की पसंद बढ़नी रूक जाती है। आप बारीकी से कुछ दिन इस कारनामें को देखें तो सब समझ में आ जाएगा।

इसके अलावा कुछ विशेष व्यक्तियों से जुड़े ब्लॉग पर बलोगवाणी पसंद की संख्या 6 या 9 से आगे नहीं बढ़ पाती
जब जब यह बात सामने आती है, तब तब अचानक ही रोकी हुई पसंदों का आंकडा सामान्य रूप से कार्य करने लगता है, एक दो दिन बाद पसंद बढ़नी फिर रूक जाती है। कुछ ब्लागरों द्वारा समय समय पर कई बार यह बात उठाई गई है। लेकिन यह सिलसिला जारी है।

इस पोस्ट के लिखे जाते तक खुशदीप सहगल के ब्लॉग पर ब्लॉगवाणी पसंद का आंकडा 9 पर रुका हुया है। आप कोशिश कर के देख लीजिए। कुछ ख़ास व्यक्तियों के नाम से जुड़े ब्लोगों को ध्यान से देखिये। अपना अनुभव यहाँ जरूर बताएं

17 August, 2009

वाट से वाट लगाते चलो, एक क्लिक ही तो करना है

बहुत हो चुका विवाद। साथी ब्लॉगर की बात ठीक लगती है। हम सब इतना हाइलाइट कर चुके जाखड़ जी को तो अब कुछ हाई टाईड और हाई पावर वाली बात होनी चाहिए

आपत्तिजनक सामग्री प्राकाशित करने के लिए गूगल को सूचना दें यहाँ क्लिक कर Submit पर क्लिक करें। इस तरह जितना ज्यादा क्लिक होते जायेंगे, गूगल पर इस ब्लॉग को हटाने का दबाव उतना ही बढ़ता जायेगा।

फिर किसकी वाट लगेगी, देखते हैं

देर किस बात की! एक क्लिक ही तो करना है।

वाट से वाट लगाते चलो

13 August, 2009

क्युं इस ब्लोगर द्वारा तिरंगे का अपमान किया जा रहा

बहुत दुख होता है जब चीख चीख कर अपमान अपशब्द जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले तिरंगे की शान को बरकरार रख पाने में असफल हो जाते हैं। चलिये ठीक है देश प्रेम की भावना जोर मारती है फिर कहा जाता है तिरंगे की शान बनाये रखिये फिर एक ऐसा कोड दिखाया जाता है जिसकी कोई नकल करना चाहे तो आसानी से न कर पाये क्युंकि वह कोड का फोटो है कोड नहीं। अब अगर कोई उस तिरंगे पर कलिक करके उसे सीधा कोपी करना चाहे तो पता चलता है कि वह फोटु भी नहीं खुलती अधकचरा सा कुछ दिखता है जो बताता है कि यह लिन्क ही गलत है।

अब आने वाला अपना देश प्रेम कैसे दिखाये। क्या यह ऐसा नहीं कि तिरंगे को फहराने के लिये डोरी खींची और तिरंगा दन्न से नीचे आ गिरे यहां तिरंगे को क्लिक किया और तिरंगा गायब खुले ही ना

आप खुद देख लीजिये http://mypoeticresponse.blogspot.com पर

क्या यह देश के राष्ट्रीय झंडे का अपमान नहीं? क्या उनकी मरजी झंडे और देश से ऊपर है।

08 August, 2009

संजय बेंगाणी किसको भड़का रहे हैं?

संजय बेंगाणी जी की भावनायों को सलाम। एक भारतीय के रूप में गूगल के इस कथित कदम का विरोध उसकी समस्त सेवाओं को त्याग कर जताना चाह रहे हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिये

लेकिन जिस गूगल के दम पर फले फूले, उसे लांछित क्यों कर रहे?

आप स्वयम देखिए वे कितने सच का सामना कर रहे।

यह तस्वीर सेटेलाईट से ली गई है, जिसका URL http://wikimapia.org/#lat=26.7456104&lon=94.0869141&z=7&l=19&m=b&v=8&search=itanagar
है। इसमें पीली सीमा रेखा देखिये, Arunachal Pradesh, India लिखा हुआ देखिये और इटानगर का गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का स्थान भी देखिए

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यह तस्वीर विकिमैपिया की है। URL है http://wikimapia.org/#lat=26.7456104&lon=94.0869141&z=7&l=19&m=s&v=9&search=itanagar
इसमें बनी प्रादेशिक सीमा देखिये, Arunachal Pradesh, India लिखा हुआ देखिये और इटानगर का गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का स्थान भी देखिये। रूसी भाषा लिखी भी देखिये

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यह तस्वीर सामान्य मानचित्र की है। URL है
http://wikimapia.org/#lat=26.7456104&lon=94.0869141&z=7&l=19&m=w&search=itanagar
इसमें बनी प्रादेशिक सीमा देखिये, Arunachal Pradesh, India लिखा हुआ देखिये और इटानगर का गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का स्थान भी देखिए। रूसी भाषा लिखी भी देखिये

कुछ समझ में नहीं आया ना?

संजय जी जिस गूगल मैप्स की बात कर रहे वह बनाया ही इसीलिये गया है कि हम आप उसे तोड़ मरोड़ कर पने उपयोग के लायक बना सकें। आप भी देखिये इस जगह http://maps.google.co.in/support/bin/answer.py?hl=hi&answer=68259 जहाँ गूगल खुद कहता है कि
'आप Google Maps में ऐसे और अधिक कस्टम मार्कर देख सकते हैं जिन्हें दूसरों ने बनाया हो या यहां तक कि आप अपने स्वयं के बना सकते हैं'

यहीं गूगल यह भी कहता है कि Google Earth Enterprise उत्पादों द्वारा निजी मानचित्र बनाये जा सकते हैं

संजय जी जिस राष्ट्रवादी विचारधारा की छाया में पनपे हैं यदि उसे कायम रखते तो अपने संस्थान की वेबसाईट chhavi.in को एक विदेशी सर्वर 72.232.161.10 पर होस्ट न करवाते जो कि Texas के Layered Technologies Inc में है।

सेवायें मत लीजिये गूगल की लेकिन इस तरह लोगों की भावनायों को भड़काने का काम कर वे क्या बताना चाह रहे हैं? भारत के हिस्से को पड़ोसी देश में अर्से से दिखाया जा रहा तब कहाँ था यह विरोध?

क्या वे इतनी सी बात नहीं जानते कि गूगल मैप्स क्या चीज है?

24 July, 2009

क्या यह लाश कुछ कहाना चाहती है?

बहुचर्चित प्रोफेसर सभरवाल मर्डर केस में नागपुर कोर्ट ने आरोपियों को यह कहते हुए छोड़ दिया था कि कोर्ट के सामने कोई सबूत नहीं पेश किया गया और न कोई गवाह ही सामने आया, इसलिए आरोपियों को बरी किया जा रहा है।

एक ताज़ा घटनाक्रम में प्रो. सभरवाल के बेटे हिमांशु के दोस्त परमिंदर की लाश डीयू कैम्पस में मिली है। परमिंदर पेशे से एकाउंटेंट थे और प्रो. सभरवाल मर्डर केस में आए नागपुर कोर्ट के फैसले खिलाफ एक रैली के आयोजन में लगे थे। परमिंदर रैली के लिए पोस्टर चिपकाने गए हुए थे और आज, शुक्रवार की सुबह परमिंदर की लाश डीयू कैम्पस में मिली।

समाचार यहाँ मौजूद है

क्या आप कुछ कहना नहीं चाहेंगे?

16 July, 2009

दीपक भारतदीप 8वीं वरीयता/ रैंकिंग के मामले में झूठ क्यों बोल रहे?

कई दिन से देख रहा था कि दीपक भारतीय लिख रहे हैं कि उनके ब्लॉग के साईड बार में जो एलेक्सा का प्रमाणपत्र लगा है उसे कहीं से कोई चुनौती नहीं मिली यह दुनियां की आठवीं वरीयता प्राप्त ब्लाग/पत्रिका है इस पर अब बहस की गुंजायश नहींआदि आदि।


नीचे चार चित्र दिये गये हैं। पहला चिट्ठाचर्चा ब्लॉग का है, दूसरा मेरे ब्लॉग का है, तीसरा निशांत के ब्लॉग का और चौथा दीपक भारतदीप के ब्लॉग का है। चारों में URL, Traffic Rank, Average time on blog आदि देखें और बतायें कौन कितने पानी में है।

चित्रों को क्लिक कर बड़ा किया जा सकता है।

चिट्ठाचर्चा के बारे में


मेरे ब्लॉग के बारे में



निशांत के हिंदीज़ेन ब्लॉग के बारे में


दीपक भारतदीप के ब्लॉग की हालत

यदि वे खुद नहीं मानते तो यह क्यों कह रहे कि अब इसमें बहस की गुंजायश नहीं? अलेक्सा की बात करते हैं वरीयता बताते हैं तो अलेक्सा की लिंक का उल्लेख करें यूआरएलट्रेन्ड्ज़ की लिंक को क्यों उद्धृत करते हैं? उन्हीं के ब्लॉग पर अलेक्सा का हो विजेट लगाया गया है उस पर क्लिक किये जाने पर भी यहां का आखिरी चित्र दिखाई देता है।

ये सभी चित्र http://www.alexa.com/siteinfo/ पर संबंधित ब्लॉग की लिंक डाल कर लिए गये हैं। आप भी अपने ब्लॉग की लिंक डाल कर देख सकते हैं कि दीपक भारतदीप कितना सच बोल रहे हैं।

11 July, 2009

संजय बेंगानी जी! गर्व से कहना और नाज़ करना अलग अलग चीजें हैं

छत्तीसगढ़ वासी हूँ इसलिए बात जरा लग गई है। संजय बेंगानी जी ने पता नहीं किस मूड में रवि रतलामी जी के रायपुर प्रवास पर लिखी गई एक पोस्ट पर लिख मारा है कि 'आप कहते हो नाज है तो होगा, वैसे जब अखबारों में महान चिट्ठों के बारे में लिखते हैं हमें रवि रतलामी का चिट्ठा कहीं नहीं दिखता. आप समझ रहें हैं मेरी बात?'

अब हम ठहरे मूरख। हमने भागदौड़ करने की बजाय गूगल पर ही सर्च मारा। नतीजा क्या आया देखिए:

raviratlami के लिए लगभग 359,000
sanjay bengani के लिए लगभग 70,400

रवि रतलामी के लिए लगभग 80,200
संजय बेंगानी के लिए लगभग 1,700

रवि रतलामी के ब्लॉग छींटें और बौछारें के लिए लगभग 176,000
संजय बेंगानी के ब्लॉग जोगलिखी के लिए लगभग 126,000

और
रवि के लिए लगभग 10,700,000
संजय के लिए लगभग 737,000

वैसे भी R, S के पहले आता है। समझ गये ना बात को?

अब भी कोई कसर बाकी है तो अपने प्रदेश के बाहर के समाचार पत्रों में अपने ब्लॉग का उल्लेख करने वाली कतरनें सामने लाईये। छत्तीसगढ़ से बाहर के समाचार पत्रों में रवि जी के ब्लॉग का उल्लेख करने वाली कतरनें हम ला देंगें।

गर्व से कहना और नाज़ करना अलग अलग है श्रीमान