कभी कभी तो समय मिल पाता है भाग दौड़ वाले धंधे से मुक्ति पा कर ब्लॉग की दुनिया में विचरणे का। ब्लॉग लिखने की फुरसत मिलती ही नहीं। यह ब्लॉग तो रचना जी की एक टिप्पणी के कारण बन गया था। सो गाहे बेगाहे गलतियां दिखाने के काम आ ही जाता है। इस बार सोचा कौन सब जगह निगाह दौड़ाये चिट्ठाजगत और चिट्ठाचरचा से ही काम चला लेते हैं
मुझे हैरानी भी हुई और तरस भी आया जब मैंने आज 22 अप्रैल वाले चिट्ठाचर्चा को देखा। पाकिस्तान की एक मशहूर गजल गायीका, जिनका जनम, लालन-पालन हरियाणा के रोहतक में हुया, उनका निधन 21 अप्रैल को हो गया था। अनूप सुक्ल महाराज ने उन्हें यह कह कर श्रद्धांजलि दी कि नूरबानो का निधन हो गया। बस फिर क्या था मीनाक्षी ने गायिका नूरबानो को श्रद्धाजंलि देते हुये उनकी याद में कबाडखाने मे उन्ही की गाई हुई गज़ल सुनी, उड़न तश्तरी ने भी लिखा नूरबानो को हमारी श्रद्धांजलि, लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने नूरबानो जी का सँगीत अमर रहने की बात करते हुये लिखा -उन्हेँ श्रध्धाँजलि!
वो तो बी एस पाबला ने याद दिलाया तो अनूप सुक्ल महाराज ने टायपिंग की गलती कहते हुये सुधार कर लिया वरना पता नहीं और कितनों ने अभी उस नूरबानों को टिका दिया होता श्रद्धांजालि का कमेंट। इकबाल बानो तो रह जाती मुँह बाये।
अभी बाकी है, आगे का किस्सा।
यह पोस्ट लिखने लगा तो फिर दिमाग घूमा। डॉ। अनुराग ने तरुण जी को पोस्टो के संग्रह के जुगाड़ के लिए शुक्रिया का एक बोरा भेज दिया और जनमदिन की बधाई भी दे दी, वर्चुअल केक के साथ। अब बताईये, पोस्टो के संग्रह के जुगाड़ करने वाले थे क्न्ट्रोल पैनल वाले तरूण और जनमदिन था अल्पना वर्मा के 13 वर्षीय सुपुत्र तरुण का। अब किसको क्या गया पता नहीं।
समझ में नहीं आता, ये कथित वरिष्ठ ब्लॉगर बिना सोचे-सम्झे-पढ़े ही टिप्पणी लिख देते हैं क्या? कौन मरा किसका जनम्दिन इन्हें कोई होश नहीं?
विशवास नही होता ना? खुद ही क्यों नहीं देख लेते http://chitthacharcha.blogspot.com/2009/04/blog-post_22.html
ये ऐसा क्यों करते हैं कोई बताये मुझ जैसे मूरख को, क्योंकि आप हो ज्ञानी