10 May, 2009

एक महिला ब्लॉगर, औरतों को अपने अंग दिखाकर पैसे कमाने वाली बताती हैं, प्रेरित भी करती हैं

हाल ही में जब मुंबई हमलों में पकड़े गये युवक, कसाब ने जज के सामने एकाएक खुद ही अपनी उम्र 21 वर्ष बतायी और गड़बड़ी का आभास होते ही सिर पकड़ कर बैठ गया तो अपन भी मुस्कुरा दिये थे। सच ही कहा है किसी ने कि दिल की बात कभी ना कभी लबों पर आ ही जाती है।

कल ही जब ब्लॉगवाणी से लिंक पकड़ कर एक ब्लॉग तक पहुँचा तो दंग रह गया। उस महिला ब्लॉगर ने यह लिख मारा था कि …

अब मैं कैसे लिखूँ? मैंने लिख दिया तो वही महिला ब्लॉगर मुझ पर नारी जाति के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने की तोहमत लगाते हुए अपनी खास शैली में पता नहीं क्या-क्या लिख देंगीं।

आप खुद ही देख लीजिए ना

उनके लिखे शब्दों को यदि कोई पुरूष लिख देता तो अब तक बवाल खड़ा हो गया होता। क्भी अपने प्रोफाईल पर कथित अपशब्दों का प्रयोग न करने के लिए सावधान करने वाली इन महोदया को स्वयं ऐसे शब्द लिखते देख मैं चकित हूँ। आखिर किसी की बपौती थोड़े ही हैं यह शब्द। शायद ऐसी सोच रखने वाले पुरूषों का एकाधिकार तोड़ा जा रहा है। तभी तो वे आगे लिखतीं हैं 'ऐसी सोच से उबरें'

अपडेट: किन्हीं अज्ञात कारणों से वह पूरी पोस्ट, टिप्पणियों समेत हटा दी गयी है। लेकिन गूगल के कैश में वह मौज़ूद है आप इन दो लिंक्स द्वारा उसे देख सकते हैं।

आपको कुछ कहना है?

08 May, 2009

'उस' हिंदी ब्लॉगर का कथित ब्लॉग, गूगल ने बंद करवाया या सरकार ने?

आखिरकार उस ब्लॉग को बंद होना ही पड़ा जो एक गंभीर संवैधानिक अपराध कर रहा था, जिससे लगभग हर जागरूक ब्लॉगर त्रस्त नज़र आता था। अभी यह जानकारी नहीं मिल पायी है कि इस ब्लॉग को गूगल ने बंद कर दिया या सरकारी कार्यवाही हुयी या फिर गूगल की चेतावनी के बाद स्वयं ब्लॉगर ने ही अपना ब्लॉग ध्वस्त कर दिया। बंद होने के पहले यह ब्लॉग ऐसा दिखता था। ये वही ब्लॉगर हैं जिन्होंने कुछ अरसा पहले राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को अपने ब्लॉग में सबसे नीचे रखने की हेठी दिखा कर एक और संवैधानिक अपराध किया था, जबकि यह अपने आप को उच्च शिक्षा प्राप्त बताते हैं। देखिये लिंक 1    लिंक 2

अनुनाद सिंह जी के अलावा अधिकतर ब्लॉगरों ने इस तरह की चेष्टा के प्रति अपना विरोध जताया था। उन सभी को धन्यवाद व बधाई, एक संवैधानिक अपराध के विरोध का साथ देने के लिए।

इस मामूली सी सफलता से अब इस दिशा की ओर सोचा जा रहा है कि टिप्पणी के रूप में अपने ब्लॉग पर आने का निमंत्रण देने वाले ब्लॉगरों के खिलाफ भी गूगल में शिकायत की जानी शुरू की जाये। भले ही वह निमंत्रण मेरे ब्लॉग पर आये या किसी और के, है तो यह सरासर मानकों के खिलाफ!

वैसे जो इस किस्से की पृष्ठभूमि नहीं जानते वे पिछली पोस्ट पढ़ सकते हैं।

आप क्या सोचते हैं?

30 April, 2009

अविनाश वाचस्पति ब्लॉगरों को क्यों भरमा रहे?


शायद यह इत्तेफाक ही होता है कि अपने व्यवसाय से कुछ पल निकाल कर जब भी ब्लॉग की दुनिया में विचरण करने आता हूँ तो कुछ ना कुछ ऐसा दिख जाता है कि मन उद्देलित हो जाता है। अब मैं अच्छा खासा आनंद ले रहा था तरह तरह के ब्लॉग लेखन का कि निगाह पड़ गयी एक ब्लॉग पर, जिसका शीर्षक था कि '… इंटरनेट से मत दीजिये' मैंने सोचा शायद ये किसी चीज की मनाही कर रहे होंगे। पढ़ना शुरू किया तो लगा कि कुछ हास्य व्यंग्य होगा। हैरानी तो मुझे तब हुई जब लिखा देखा कि 

हम चर्चा कर रहे हैं ...तकनालॉजी के वरदानीय स्वरूप की जिसका लुत्फ आप इन चुनावों में ले पाएंगे। यह लिंक है चुनाव कमीशन की साइट का। ...बेघर हुए बिना ...घर से भी न निकलें ...इस लिंक को खोलें और अपने वोटर कार्ड के नंबर को तैयार रखें। लिंक में जाकर उपयुक्त स्थल को तलाशें फिर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें। अब आप तैयार हो जाएं आने वाले चुनाव में अपना मत इंटरनेट के जरिए देने के लिए। ...जैसे आप अपना बैंक खाता ऑपरेट करते हैं। क्रेडिट खाते से खरीद करते हैं। इंटरनेट से अपना मत डालने के लिए आपको अपने क्रेडिट कार्ड अथवा नेटबैंकिंग सुविधा से मात्र रुपये 11/- (ग्यारह) केवल का भुगतान करना होगा। ...जो चाहते हैं घर में ही रहना और अपना मत देना। वे इस लिंक पर क्लिक करें, पंजीकरण करें, भुगतान करें और बेघर हुए बिना अपना मत अपने पसंद के प्रत्याशी को दें।
मैंने कोशिश की इस बात की, कि इसमें भी कोई अप्रैल फूल या कोई मूर्ख दिवस या ऐसा ही कोई नया नवेला दिन हो। ब्लॉगर अविनाश वाचस्पति का प्रोफाईल देखा तो पाया कि ज़नाब भारत सरकार के सूचना-प्रसारण मंत्रालय में हैं। फिर पलट कर आये,  बहुत खोजा कि कहीं लिखा हुया मिल जाये कि यह पोस्ट  हास्य-व्यंग्य की श्रेणी की है। पर असफलता हाथ लगी। अलबता यह ज़रूर दिखा कि

इस सुविधा के प्रयोग आप अपने जोखिम पर करें क्योंकि पहली बार मिलने वाली इस सुविधा से आप वोट जिस प्रत्याशी को डालेंगे। हो सकता है उसे इंटरनेट पर सक्रिय कोई और प्रत्याशी हैक कर के अपने नाम में संजो ले। इसलिए इस सुविधा का प्रचार प्रसार नहीं किया गया है यह सुविधा सिर्फ ब्लॉगरों के समय की महत्ता को ध्यान में रखकर गुप्त तौर पर दी गई है। जिससे वे अपने बचे हुए समय का उपयोग पोस्टें पढ़ने, लिखने और पसंद चटकाने में कर सकें। यदि आप यह जोखिम लेने को तैयार हैं तो जुट जाएं अभी से ......... और अपने अपने अनुभव टिप्पणियों में बतलायें।
मैंने सोचा कि टिप्पणियों में क्यों बताऊँ। बताऊंगा तो अपनी पोस्ट में कि जिस वेबसाईट की वो बात कर रहें हैं वह एक ब्यक्तिगत वेबसाईट है जिसका चुनाव आयोग से कोई लेना देना नहीं है। जैसा कि वेबसाईट के मालिक कहते हैं

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एक व्यक्तिगत वेबसाईट आपसे आपका वोटर आई डी कार्ड का नम्बर ले लेगी, क्रेडिट कार्ड नम्बर ले लेगी, आपकी ईमेल आईडी वगैरह लेगी। फिर जब इसका दुरूपयोग होगा तो आप इसकी जिम्मेदारी किस पर डालएंगे? अब बताईये, एक जिम्मेदार सरकारी पद पर रहने वाला भारत सरकार का कर्मचारी अपने साथियों को असमय  भरमा नहीं रहा। क्या चुनाव आयोग की निगाह नहीं पड़ी अभी तक इस पर? 

24 April, 2009

वाराणसी के हिंदी दैनिक पर पाकिस्तान सायबर आर्मी का हमला

किसी मामले की खोज करते हुए जब गूगल सर्च पर वाराणसी के दैनिक आज की खोज खबर ले रहा था तो उसका इंटरनेट संस्करण दिखा। अब यह मुझे मालूम नहीं कि मशहूर रहा यह दैनिक अब प्रकाशित होता है या नहीं लेकिन इसके इंटरनेट संस्करण के लिए क्लिक किया तो हैरान रह गया। मैंने देखा कि उस पर पाकिस्तान सायबर आर्मी का कब्जा है।

आप भी देखिये ताजा हाल  http://www.ajsamachar.com/ 


इसका रज़िस्ट्रेशन करवाने वाले थे 
Corporate Solutions
Amit Singh ()
ML-22 Sector-L
aliganj
lucknow
Uttar Pradesh,226001

पता नहीं यह किसी ने देखा है या नहीं

23 April, 2009

देखिए कैसे वरिष्ठ ब्लॉगर भी बिन पढ़े कमेंट कर रहे हैं

कभी कभी तो समय मिल पाता है भाग दौड़ वाले धंधे से मुक्ति पा कर ब्लॉग की दुनिया में विचरणे का। ब्लॉग लिखने की फुरसत मिलती ही नहीं। यह ब्लॉग तो रचना जी की एक टिप्पणी के कारण बन गया था। सो गाहे बेगाहे गलतियां दिखाने के काम आ ही जाता है। इस बार सोचा कौन सब जगह निगाह दौड़ाये चिट्ठाजगत और चिट्ठाचरचा से ही काम चला लेते हैं

मुझे हैरानी भी हुई और तरस भी आया जब मैंने आज 22 अप्रैल वाले चिट्ठाचर्चा को देखा। पाकिस्तान की एक मशहूर गजल गायीका, जिनका जनम, लालन-पालन हरियाणा के रोहतक में हुया, उनका निधन 21 अप्रैल को हो गया था। अनूप सुक्ल महाराज ने उन्हें यह कह कर श्रद्धांजलि दी कि नूरबानो का निधन हो गया। बस फिर क्या था मीनाक्षी ने गायिका नूरबानो को श्रद्धाजंलि देते हुये उनकी याद में कबाडखाने मे उन्ही की गाई हुई गज़ल सुनी, उड़न तश्तरी ने भी लिखा नूरबानो को हमारी श्रद्धांजलि, लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने नूरबानो जी का सँगीत अमर रहने की बात करते हुये लिखा -उन्हेँ श्रध्धाँजलि!

वो तो बी एस पाबला ने याद दिलाया तो अनूप सुक्ल महाराज ने टायपिंग की गलती कहते हुये सुधार कर लिया वरना पता नहीं और कितनों ने अभी उस नूरबानों को टिका दिया होता श्रद्धांजालि का कमेंट। इकबाल बानो तो रह जाती मुँह बाये।

अभी बाकी है, आगे का किस्सा।

यह पोस्ट लिखने लगा तो फिर दिमाग घूमा। डॉ। अनुराग ने तरुण जी को पोस्टो के संग्रह के जुगाड़ के लिए शुक्रिया का एक बोरा भेज दिया और जनमदिन की बधाई भी दे दी, वर्चुअल केक के साथ। अब बताईये, पोस्टो के संग्रह के जुगाड़ करने वाले थे क्न्ट्रोल पैनल वाले तरूण और जनमदिन था अल्पना वर्मा के 13 वर्षीय सुपुत्र तरुण का। अब किसको क्या गया पता नहीं।

समझ में नहीं आता, ये कथित वरिष्ठ ब्लॉगर बिना सोचे-सम्झे-पढ़े ही टिप्पणी लिख देते हैं क्या? कौन मरा किसका जनम्दिन इन्हें कोई होश नहीं?

विशवास नही होता ना? खुद ही क्यों नहीं देख लेते http://chitthacharcha.blogspot.com/2009/04/blog-post_22.html

ये ऐसा क्यों करते हैं कोई बताये मुझ जैसे मूरख को, क्योंकि आप हो ज्ञानी

25 March, 2009

एक और लेख चुराकर दो ब्लॉगों पर डाला गया

लगातार यात्रायों के कारण, एकाग्र हो कर इंटरनेट पर बैठ पाना बहुत मुश्किल होता है। आज फुरसत से बैठा, ब्लॉगवाणी पर नज़र गयी पहले पन्ने पर ही चौंक पड़ा। नये साल की शुरूआत में जिस CNBC, IBN  के जोश वेबसाईट वाले लेख को पढ़ मन वाह-वाह कर उठा था, वही लेख आज किसी ने अपने नाम से छाप दिया है, बिना किसी सौजन्यता के। पढ़ने वाले उन्हें उकसा भी रहे हैं कि लिख्ते रहिए।

थोड़ी तहकीकत की तो पता लगा एक और स्थान पर भी वही लेख शब्दश: डाल दिया गया है, अपने नाम के साथ, बिना सौजन्यता के, बिना उल्लेख के!

यकीन नहीं होता? देखिये चित्र उस ब्लॉग का जिसका नाम ही है इसको देखो 24 मार्च को
















दूसरा ब्लॉग है, जिसका नाम है हिन्दुस्तान का दर्द 21 फरवरी को


















अब देखिये मूल लेख 9 जनवरी को



















अब कहना पड़ेगा जोश देखो या इसको देखो ये है हिन्दुस्तान का दर्द 

21 February, 2009

क्या होगा, इस ब्लॉग का, जो गंभीर संवैधानिक अपराध कर रहा है?

मेरे ख्याल से पिछले चौबीस घंटों में अधिकतर ब्लागरों ने यह टिपण्णी पायी होगी कि

फ़ालो करें और नयी सरकारी नौकरियों की जानकारी प्राप्त करें:
सरकारी नौकरियाँ

ये कथित टिप्पणी आपको हर विषय की पोस्ट के ज़वाब में मिल जायेंगी, हर जाने-माने नियमित ब्लॉग पर मिल जायेंगी। लगभग 170 ब्लॉग का पीछा करने वाला अपने ब्लॉग का पीछा करवाने पर तुला हुया है!

हर ब्लॉगर चाहता है कि उसके ब्लॉग पर लोग आ कर टिप्पणी करें। ट्रैफिक बढायें। विज्ञापनों पर क्लिक करें। लेकिन यह 'विनय' पूर्वक कभी कहते हैं आप सादर आमंत्रित हैं, आनन्द बक्षी की गीत जीवनी का दूसरा भाग पढ़ें और अपनी राय दें! कभी कहते हैं फ़ालो करें और … इन्हें ब्लॉग लेखक के विचारों से कतई मतलब नहीं। अपने ब्लॉग पर इन्होंने, भारत सरकार का प्रतीक चिन्ह भी लग रखा है, जो एक गंभीर वैधानिक अपराध है।

इस राष्ट्रीय प्रतीक के बने नियम में साफ लिखा है कि कोई भी व्यक्ति किसी व्यापार, कारोबार, आजीविका वृत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अथवा किसी शीर्षक डिजाइन में प्रतीक अथवा उससे मिलते जुलती नकल का प्रयोग नहीं करेगा।

आज मैंने, मेरे कई ब्लॉगर साथियों ने गूगल को शिकायत दर्ज करवायी है, इनकी हरकतों और भारत सरकार के प्रतीक चिन्ह के उपयोग के विरूद्ध । भारतीय एजेंसियों तक भी बात पहुंचाई जा रही है। आप भी कम से कम गूगल पर इनके ब्लोग की शिकायत कर सकते हैं। बेशक यह ब्लॉग चर्चित हो जायेगा, लेकिन इसे ख़त्म तो होना ही होगा।

अब यह देखना बाकी है ये सार्वजनिक रूप में, अपने ब्लॉग पर अपने पाठकों से क्षमा मांगते हुये, भारत सरकार का प्रतीक चिह हटाते हैं या नहीं। ये हटायें या ना। गूगल cache में तो इनकी हरकत रिकॉर्ड ही है।

नहीं तो भारतीय संविधान में इनके विरूद्ध त्वरित कार्रवाई हेतु कई प्रावधान हैं। जिनमें मूल रूप में THE EMBLEMS AND NAMES (PREVENTION OF IMPROPER USE) ACT, 1950 प्रमुख है। बाकी इसके लिए दो कानून हैं जिनमें- भारत का राज्य संप्रतीक (अनुचित प्रयोग प्रतिषेध) अधिनियम 2005 और भारत का राज्य संप्रतीक (प्रयोग का विनियम) नियम 2007।

वैसे इस चिन्ह के उपयोगकर्ता आदि की अधिक जानकारी के लिए इस आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति को पढ़ सकते हैं।

तो इंतज़ार किस बात का!?