थोड़ी तहकीकत की तो पता लगा एक और स्थान पर भी वही लेख शब्दश: डाल दिया गया है, अपने नाम के साथ, बिना सौजन्यता के, बिना उल्लेख के!
यकीन नहीं होता? देखिये चित्र उस ब्लॉग का जिसका नाम ही है इसको देखो 24 मार्च को

दूसरा ब्लॉग है, जिसका नाम है हिन्दुस्तान का दर्द 21 फरवरी को

अब देखिये मूल लेख 9 जनवरी को

अब कहना पड़ेगा जोश देखो या इसको देखो ये है हिन्दुस्तान का दर्द