13 October, 2009

हिंदी ब्लोगिंग में जनमदिन और प्रोफाईल की रचना हटाने के बेमतलब हन्गामे का सच

पिछले दिनों अपनी प्रोफाइळ को छुपाकर कर हिंदी ब्लोगिंग में अपने कमेंट देने वाले और अपने एक ब्लोग को हटाकर कर जनमदिन हटवाने आयी ब्लोगर का कहना था कि वह कहीं अपनी पहचान नहीं रखना चाहती।लेकिन अपने ही हाथों से उन्होंने जो अपना,अपनी फर्म का,अपने पते का,अपने इमेल का,अपने फोन का,अपने घर का,अपनी हलचलों का,अपने ब्लोग का ब्यौरा इंटरनेट पर फैला रखा है उसे कैसे नकारेंगे।
मुझ पर कोई अंगुली उठाये उसके पहले जान ले कि यह सब इंटर्नेट पर है।कोई भी देख सकता है मैंने भी देख लिया।मैंने कोई गुनाह नहीं किया।मुझे तो शाबासी मिलनी चाहिये कि सभी लिंक एक जगह रकह दिये।

यहां उनका पूरा पता,फोन,नाम,ईमेल वगैरह देखिये।देख लें सबै अन्ग्रेजी में है हिंदी की कोई लिंक नहीं


http://www.tradeindia.com/Seller-1347999-1393173-115-BRANDING/Textile-Dyers-Processors-Printers/RACHNA-DESIGNS.html









LinkedIn पर देखिये
http://www.linkedin.com/pub/rachna-singh/10/875/b02



यहां 3रे नम्बर पर देखिये

यहां 4थे नम्बर पर देखिये जानकारी
http://www.exportersindia.com/indian-services/textile.htm

यहां 34वें नम्बर पर देखिये
http://www.hepcindia.com/texstyle_partlist.html

यहां 10वें नम्बर पर देखिये
http://www.texnett.com/cgi-bin/category/displaycat.pl?page=1&cattype=Consultants-General&catsubtype=Q-T



http://74.125.93.132/search?q=cache:epkK4Z-lcBcJ:www.asia.ru/en/Clear/SaveCompanyProduct%3Fcompany_id%3D50840+%22B-+24,+Ramprastha%22&hl=hi&gl=in


जब इतना कुछ खुद ही फैला रखा है अन्ग्रेजी वाले इन्टरनेट पर तो हिंदी ब्लोगिंग पर इतना हन्गामा क्यों मचाया हुया है? आखिर क्या हासिल होगा हिंदी ब्लोगिंग को बदनाम कर? क्या आपको नहीं लगता पिछले दो तीन दिनों में जो कुछ हुया वह बेमतलब था हिंदी ब्लोगिंग को बदनाम करने के लिये?सिर्फ एक ब्लोग पर उनकी उमर क्या लिख दी गैई ...

02 October, 2009

ब्लॉगवाणी के चरित्र पर कुछ गंभीर बातें

यहाँ पर मैं सिलसिलेवार, पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ। पूरी बात शुरू से बता रहा हूँ क्योंकि यह सार्वजनिक महत्व का विषय है। सार्वजनिक महत्व का विषय क्यों है, वह भी बताऊँगा। ...उनकी इच्छा है, मेरा चिट्ठा रखें या न रखें। मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। न रखें तो शायद उनके लिए बेहतर होगा, क्योंकि मैं अनैतिक चीज़ों का खुलासा यहाँ करता ही रहूँगा। मुझे पता है कि यदि ब्लॉगवाणी से संबंध रहे तो ऐसे प्रकरण दुबारा होंगे, क्योंकि यह दोष संचालन का है। या तो मुख्य संचालक को पता ही नहीं है कि चल क्या रहा है, या सब संचालक की जानकारी में रहते हुए हो रहा है। मुझे ऐसे स्थल पर आस्था नहीं है। मुझे नहीं लगता कि वह मेरे लिए उपयोगी होगा। इतना ही नहीं मुझे तो लगता है कि इससे हिंदी जाल जगत को बहुत बड़ा नुकसान होगा। हाँ. यदि मेरे ब्लॉगवाणी के साथ कोई आर्थिक संबंध होते या वित्तीय रूप से उनपर आश्रय होता तो यह ज़िल्लत ज़रूर झेलता। पर मुझे यह करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

आपको कुछ आपत्तिजनक लगा हो तो बताएँ। मैं खुलासा दूँगा, या आपसे माफ़ी माँगूँगा और अपने आपको सुधारने का यत्न करूँगा। ... हाँ, यदि किसी अन्य नें मेरे दुर्व्यवहार का ब्यौरा दिया हो तो उसके बारे में पहले एक बार मुझ से पूछ कर जाँच लें, खुलासे या गलती मानने का मौका दें, फिर मेरे बारे में फैसला करें। आप यदि निजी पसंद या नापसंद के लिए रखना चाहें तो रखें। ...क्या मैंने गाली गलौज की है? ब्लॉगवाणी के संचालक यदि इतने अच्छे हैं तो वे इसका विरोध क्यों दर्ज नहीं करते? इस बात का आश्वासन क्यों नहीं देते कि ऐसा दुबारा नहीं होगा।

ब्लॉगवाणी द्वारा संस्थागत तरीके से फ़र्ज़ी पहचान बना के लोगों को गुमराह करना, और कई बार टिप्पणियों में गालीगलौच होने पर भी कोई आधिकारिक विरोध न होना, उसके बजाय उसको संरक्षण देने से है। यदि किसी संस्था का यही काम करने का ढंग हो, तो मैं उससे संबद्ध न रहना चाहता हूँ ... हम क्यों झेलें? क्या आप घर और काम से समय निकाल कर इसलिए अंतर्जाल पर आते हैं कि ज़लील किए जाएँ?

मैं भी पंजाब में रहता हूँ, गालियाँ तो मुझे भी आती हैं। ... सभी आक्षेप ब्लॉगवाणी के संचालन प्रणाली पर हैं, किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं। कृपया टिप्पणी करें तो ब्लॉगवाणी की संचालन प्रणाली पर करें, व्यक्तियों पर नहीं।

मैंने कुछ मित्रों से पूछा, कि क्या हो सकता है, कि यह चिट्ठा ब्लॉगवाणी पर दिखना बंद हो गया... उनके स्थल पर डाक पता था, सो लिखा कोई जवाब नहीं आया। इस बीच कुछ लोगों ने इस बारे में प्रविष्टियाँ लिखीं। ...कुछ ने ब्लॉगवाणी से जवाबदेही की माँग की। ... पुष्टि हो गई कि यह तकनीकी खराबी की वजह से नहीं ... बल्कि जानबूझ कर ... पता चला कि {नूर मोहम्मद खान बनाम मैथिली गुप्त बनाम धुरविरोधी}, अभिनव, और सिरिल मैथिली गुप्त एक ही परिवार के सदस्य हैं और तीनो ब्लॉगवाणी से संबद्ध हैं। साथ ही अरुन अरोरा नामक एक सज्जन भी ब्लॉगवाणी से संबद्ध हैं। इनमें से कौन ब्लॉगवाणी का वास्तविक संचालक है, और किनकी क्या क्या ज़िम्मेदारियाँ हैं, यह मुझे ज्ञात नहीं।... अच्छा हुआ जो इस घटना क्रम से यह पता चल गया। यह सब तो थे तथ्य।

ब्लॉगवाणी के संचालकों को विरोध था तो ... कई छद्म नामों से क्यों ऐसा किया? यह अनैतिक है। क्या उन्हें इसके लिए क्षमा नहीं माँगनी चाहिए, क्या यह वादा नहीं करना चाहिए कि ऐसा वे पुनः नहीं करेंगे? पर अगर वादा किया भी तो क्या गारंटी है कि ऐसा फिर से नहीं होगा। क्या ब्लॉगवाणी के संचालक को मालूम था, पर उन्होंने कुछ कहना या करना ज़रूरी नहीं समझा? हिंदी जाल जगत के बाशिंदे क्या अब इस प्रकार के व्यवहार के आदी हो चुके हैं? क्या हम सबको यह सहज व स्वाभाविक लगता है? क्या ऐसे व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार नहीं होना चाहिए? जो संस्था ऐसे व्यक्ति को पाल रही है क्या उसका सामाजिक बहिष्कार नहीं होना चाहिए?

जिस स्थल की चिट्ठे शामिल करने और निकालने का कोई हिसाब ही न हो, और जो इस प्रकार की दूषित नीतियाँ अपनाता है, क्या उसपर भरोसा करेंगे? क्या आप उसको मान देंगे? सिर्फ़ इसलिए कि वह हिंदी में है? अब तक मैं यह मान के चल रहा था कि यदि कोई हिंदी में अंतर्जाल पर कुछ शुरू करता है तो वह सुचरित्र ही होगा। पर पता चल गया कि ऐसा नहीं है। मैं यदि किसी स्थल या परियोजना से जुड़ूँगा तो इस प्रकार की आचार संहिता के अधीन ही

पंगेबाज तो इंटरनेट के सर्टीफाईड बंदर हैं ... ये आपको लाख गाली दें, आपका चरित्र हनन करें, फर्जी नाम यहाँ तक की खुद आपके ही नाम से टिप्पणी करें पर आप इनका कुछ उखाड़ नहीं सकते … अगर ये ही चिट्ठाजगत के भद्रपुरुष चिंतक हैं तो आप अकेले क्या कर सकेंगे। -देबाशिष

एग्रीगेटर संचालक चाहे वे कोई भी हो अपनी गरीमा बनाए रखे और इसके लिए जरूरी कदम उठाए. -संजय बेंगाणी

क्या किसी की छ्द्म पहचान को बेनक़ाब करना नैतिक है..? -अभय तिवारी

मैं छद्म नाम से ब्‍लॉगिगं करने में संतोष पाता हूँ। ...आप लोगों को जासूसी करने के लिए उक्‍साकर कोई नैतिकता का विमर्श नहीं खड़ा कर रहे हैं। हमारा यह सैद्धांतिक पक्ष रहा है कि बेनाम या छद्म नाम से ब्‍लॉगिंग करना ब्‍लॉगर का हक है। -मसिजीवी

एग्रीगेटर संबंधी विवादों के सिलसिले में मेरे पिछले अनुभव ने सिखाया कि समय और ऊर्जा को इन कामों में खपाना बेवकूफी ही है। ...
हमारे कई चिट्ठाकार साथी सच्चाई और नैतिकता से अधिक अपने पक्ष या गुट के हिसाब से अपनी राय बनाते-व्यक्त करते हैं। सच्चाई और नैतिकता लोकतंत्र के बहुमत की मोहताज नहीं होती -सृजन शिल्पी
<><><><><><><><><><><><><><><><><><><><><
सभी पाठक ध्यान दें --- यहां लिखा गया कोई भी शब्द मेरा नहीं है

<><><><><><><><><><><><><><><><><><><><><>


हो सकता है मेरे इस ब्लॉग को ब्लॉगवाणी से हटा दिया जाये। यदि ऐसा होता है तो आप इसे चिट्ठाजगत एग्रीगेतर पर देख सकते हैं या इसे ईमेल में प्राप्त करने का लिंक आपको इसि पोस्ट पर दे दिया जायेगा

29 September, 2009

27 September, 2009

ब्लॉगवाणी करता है पक्षपात ख़ास ब्लोगरों के साथ: सबूत भी हैं

हरेक ब्लॉगर की आंखों का तारा ब्लॉगवाणी करता है पक्षपात! चौंकिए मत। ये सच है।

सबूत के तौर पर आज रात 11:12 तक ब्लॉगवाणी में इस वक्त सबसे उपर चल रहे खुशदीप सहगल के ब्लॉग पर ब्लॉगवाणी पसंद पर क्लिक कर अपनी पसंद दर्ज कराने की कोशिश कीजिए। जवाब मिलेगा कि आप अपना वोट पहले ही दर्ज करा चुके हैं!!

यहाँ सिलसिला नजर में आया था तब, जब पंगेबाज के नाम से जाने वाले ब्लॉगर को दिनेशराय द्विवेदी जी ने कथित रूप से अनुचित ईमेल भेजी थी और उसके बाद के घटनाक्रमों के कारण द्विवेदी जी के ब्लोगों पर ब्लॉगवाणी पसंद पर क्लिक किए जाने पर अंकों का बढ़ना रोका गया था। इसमें भी उनकी टापू पर आग वाली पोस्ट का खासा जिक्र हुया था। उस समय तो द्विवेदी जी ने ब्लॉगवाणी पसंद के चित्र के ऊपर ही लिख दिया था की यहाँ क्लिक करने का कष्ट ना करें, यह संख्या बढेगी नहीं!! बाद में उन्होंने उसे हटा लिया था।

यही नहीं, कुछ खासा विचारधारा की ब्लॉग पोस्टों की पसंद अप्रत्याशित रूप से बढ़ती रहती है, जबकि उसी समय पर आई अन्य पोस्टों की पसंद बढ़नी रूक जाती है। आप बारीकी से कुछ दिन इस कारनामें को देखें तो सब समझ में आ जाएगा।

इसके अलावा कुछ विशेष व्यक्तियों से जुड़े ब्लॉग पर बलोगवाणी पसंद की संख्या 6 या 9 से आगे नहीं बढ़ पाती
जब जब यह बात सामने आती है, तब तब अचानक ही रोकी हुई पसंदों का आंकडा सामान्य रूप से कार्य करने लगता है, एक दो दिन बाद पसंद बढ़नी फिर रूक जाती है। कुछ ब्लागरों द्वारा समय समय पर कई बार यह बात उठाई गई है। लेकिन यह सिलसिला जारी है।

इस पोस्ट के लिखे जाते तक खुशदीप सहगल के ब्लॉग पर ब्लॉगवाणी पसंद का आंकडा 9 पर रुका हुया है। आप कोशिश कर के देख लीजिए। कुछ ख़ास व्यक्तियों के नाम से जुड़े ब्लोगों को ध्यान से देखिये। अपना अनुभव यहाँ जरूर बताएं

17 August, 2009

वाट से वाट लगाते चलो, एक क्लिक ही तो करना है

बहुत हो चुका विवाद। साथी ब्लॉगर की बात ठीक लगती है। हम सब इतना हाइलाइट कर चुके जाखड़ जी को तो अब कुछ हाई टाईड और हाई पावर वाली बात होनी चाहिए

आपत्तिजनक सामग्री प्राकाशित करने के लिए गूगल को सूचना दें यहाँ क्लिक कर Submit पर क्लिक करें। इस तरह जितना ज्यादा क्लिक होते जायेंगे, गूगल पर इस ब्लॉग को हटाने का दबाव उतना ही बढ़ता जायेगा।

फिर किसकी वाट लगेगी, देखते हैं

देर किस बात की! एक क्लिक ही तो करना है।

वाट से वाट लगाते चलो

13 August, 2009

क्युं इस ब्लोगर द्वारा तिरंगे का अपमान किया जा रहा

बहुत दुख होता है जब चीख चीख कर अपमान अपशब्द जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले तिरंगे की शान को बरकरार रख पाने में असफल हो जाते हैं। चलिये ठीक है देश प्रेम की भावना जोर मारती है फिर कहा जाता है तिरंगे की शान बनाये रखिये फिर एक ऐसा कोड दिखाया जाता है जिसकी कोई नकल करना चाहे तो आसानी से न कर पाये क्युंकि वह कोड का फोटो है कोड नहीं। अब अगर कोई उस तिरंगे पर कलिक करके उसे सीधा कोपी करना चाहे तो पता चलता है कि वह फोटु भी नहीं खुलती अधकचरा सा कुछ दिखता है जो बताता है कि यह लिन्क ही गलत है।

अब आने वाला अपना देश प्रेम कैसे दिखाये। क्या यह ऐसा नहीं कि तिरंगे को फहराने के लिये डोरी खींची और तिरंगा दन्न से नीचे आ गिरे यहां तिरंगे को क्लिक किया और तिरंगा गायब खुले ही ना

आप खुद देख लीजिये http://mypoeticresponse.blogspot.com पर

क्या यह देश के राष्ट्रीय झंडे का अपमान नहीं? क्या उनकी मरजी झंडे और देश से ऊपर है।

08 August, 2009

संजय बेंगाणी किसको भड़का रहे हैं?

संजय बेंगाणी जी की भावनायों को सलाम। एक भारतीय के रूप में गूगल के इस कथित कदम का विरोध उसकी समस्त सेवाओं को त्याग कर जताना चाह रहे हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिये

लेकिन जिस गूगल के दम पर फले फूले, उसे लांछित क्यों कर रहे?

आप स्वयम देखिए वे कितने सच का सामना कर रहे।

यह तस्वीर सेटेलाईट से ली गई है, जिसका URL http://wikimapia.org/#lat=26.7456104&lon=94.0869141&z=7&l=19&m=b&v=8&search=itanagar
है। इसमें पीली सीमा रेखा देखिये, Arunachal Pradesh, India लिखा हुआ देखिये और इटानगर का गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का स्थान भी देखिए

------------------------------------------------------

यह तस्वीर विकिमैपिया की है। URL है http://wikimapia.org/#lat=26.7456104&lon=94.0869141&z=7&l=19&m=s&v=9&search=itanagar
इसमें बनी प्रादेशिक सीमा देखिये, Arunachal Pradesh, India लिखा हुआ देखिये और इटानगर का गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का स्थान भी देखिये। रूसी भाषा लिखी भी देखिये

----------------------------------------

यह तस्वीर सामान्य मानचित्र की है। URL है
http://wikimapia.org/#lat=26.7456104&lon=94.0869141&z=7&l=19&m=w&search=itanagar
इसमें बनी प्रादेशिक सीमा देखिये, Arunachal Pradesh, India लिखा हुआ देखिये और इटानगर का गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का स्थान भी देखिए। रूसी भाषा लिखी भी देखिये

कुछ समझ में नहीं आया ना?

संजय जी जिस गूगल मैप्स की बात कर रहे वह बनाया ही इसीलिये गया है कि हम आप उसे तोड़ मरोड़ कर पने उपयोग के लायक बना सकें। आप भी देखिये इस जगह http://maps.google.co.in/support/bin/answer.py?hl=hi&answer=68259 जहाँ गूगल खुद कहता है कि
'आप Google Maps में ऐसे और अधिक कस्टम मार्कर देख सकते हैं जिन्हें दूसरों ने बनाया हो या यहां तक कि आप अपने स्वयं के बना सकते हैं'

यहीं गूगल यह भी कहता है कि Google Earth Enterprise उत्पादों द्वारा निजी मानचित्र बनाये जा सकते हैं

संजय जी जिस राष्ट्रवादी विचारधारा की छाया में पनपे हैं यदि उसे कायम रखते तो अपने संस्थान की वेबसाईट chhavi.in को एक विदेशी सर्वर 72.232.161.10 पर होस्ट न करवाते जो कि Texas के Layered Technologies Inc में है।

सेवायें मत लीजिये गूगल की लेकिन इस तरह लोगों की भावनायों को भड़काने का काम कर वे क्या बताना चाह रहे हैं? भारत के हिस्से को पड़ोसी देश में अर्से से दिखाया जा रहा तब कहाँ था यह विरोध?

क्या वे इतनी सी बात नहीं जानते कि गूगल मैप्स क्या चीज है?

24 July, 2009

क्या यह लाश कुछ कहाना चाहती है?

बहुचर्चित प्रोफेसर सभरवाल मर्डर केस में नागपुर कोर्ट ने आरोपियों को यह कहते हुए छोड़ दिया था कि कोर्ट के सामने कोई सबूत नहीं पेश किया गया और न कोई गवाह ही सामने आया, इसलिए आरोपियों को बरी किया जा रहा है।

एक ताज़ा घटनाक्रम में प्रो. सभरवाल के बेटे हिमांशु के दोस्त परमिंदर की लाश डीयू कैम्पस में मिली है। परमिंदर पेशे से एकाउंटेंट थे और प्रो. सभरवाल मर्डर केस में आए नागपुर कोर्ट के फैसले खिलाफ एक रैली के आयोजन में लगे थे। परमिंदर रैली के लिए पोस्टर चिपकाने गए हुए थे और आज, शुक्रवार की सुबह परमिंदर की लाश डीयू कैम्पस में मिली।

समाचार यहाँ मौजूद है

क्या आप कुछ कहना नहीं चाहेंगे?

16 July, 2009

दीपक भारतदीप 8वीं वरीयता/ रैंकिंग के मामले में झूठ क्यों बोल रहे?

कई दिन से देख रहा था कि दीपक भारतीय लिख रहे हैं कि उनके ब्लॉग के साईड बार में जो एलेक्सा का प्रमाणपत्र लगा है उसे कहीं से कोई चुनौती नहीं मिली यह दुनियां की आठवीं वरीयता प्राप्त ब्लाग/पत्रिका है इस पर अब बहस की गुंजायश नहींआदि आदि।


नीचे चार चित्र दिये गये हैं। पहला चिट्ठाचर्चा ब्लॉग का है, दूसरा मेरे ब्लॉग का है, तीसरा निशांत के ब्लॉग का और चौथा दीपक भारतदीप के ब्लॉग का है। चारों में URL, Traffic Rank, Average time on blog आदि देखें और बतायें कौन कितने पानी में है।

चित्रों को क्लिक कर बड़ा किया जा सकता है।

चिट्ठाचर्चा के बारे में


मेरे ब्लॉग के बारे में



निशांत के हिंदीज़ेन ब्लॉग के बारे में


दीपक भारतदीप के ब्लॉग की हालत

यदि वे खुद नहीं मानते तो यह क्यों कह रहे कि अब इसमें बहस की गुंजायश नहीं? अलेक्सा की बात करते हैं वरीयता बताते हैं तो अलेक्सा की लिंक का उल्लेख करें यूआरएलट्रेन्ड्ज़ की लिंक को क्यों उद्धृत करते हैं? उन्हीं के ब्लॉग पर अलेक्सा का हो विजेट लगाया गया है उस पर क्लिक किये जाने पर भी यहां का आखिरी चित्र दिखाई देता है।

ये सभी चित्र http://www.alexa.com/siteinfo/ पर संबंधित ब्लॉग की लिंक डाल कर लिए गये हैं। आप भी अपने ब्लॉग की लिंक डाल कर देख सकते हैं कि दीपक भारतदीप कितना सच बोल रहे हैं।

11 July, 2009

संजय बेंगानी जी! गर्व से कहना और नाज़ करना अलग अलग चीजें हैं

छत्तीसगढ़ वासी हूँ इसलिए बात जरा लग गई है। संजय बेंगानी जी ने पता नहीं किस मूड में रवि रतलामी जी के रायपुर प्रवास पर लिखी गई एक पोस्ट पर लिख मारा है कि 'आप कहते हो नाज है तो होगा, वैसे जब अखबारों में महान चिट्ठों के बारे में लिखते हैं हमें रवि रतलामी का चिट्ठा कहीं नहीं दिखता. आप समझ रहें हैं मेरी बात?'

अब हम ठहरे मूरख। हमने भागदौड़ करने की बजाय गूगल पर ही सर्च मारा। नतीजा क्या आया देखिए:

raviratlami के लिए लगभग 359,000
sanjay bengani के लिए लगभग 70,400

रवि रतलामी के लिए लगभग 80,200
संजय बेंगानी के लिए लगभग 1,700

रवि रतलामी के ब्लॉग छींटें और बौछारें के लिए लगभग 176,000
संजय बेंगानी के ब्लॉग जोगलिखी के लिए लगभग 126,000

और
रवि के लिए लगभग 10,700,000
संजय के लिए लगभग 737,000

वैसे भी R, S के पहले आता है। समझ गये ना बात को?

अब भी कोई कसर बाकी है तो अपने प्रदेश के बाहर के समाचार पत्रों में अपने ब्लॉग का उल्लेख करने वाली कतरनें सामने लाईये। छत्तीसगढ़ से बाहर के समाचार पत्रों में रवि जी के ब्लॉग का उल्लेख करने वाली कतरनें हम ला देंगें।

गर्व से कहना और नाज़ करना अलग अलग है श्रीमान

08 July, 2009

एक ऐसा ब्लॉग जिसे ब्लॉगवाणी ने अपनाने से इंकार कर दिया

इस ब्लॉग को पिछले कई दिनों से देख रहा हूँ। हालांकि इस पर पहुँचा था मैं गूगल से। सर्च कर रहा था "अमेरिकी इतिहास" तो 4 लाख सर्च परिणामों में यह सातवें नम्बर पर दिखा। आज शायद पांचवें नम्बर पर है। एक सीधा सादा सा जानकारी परक ब्लॉग अमेरिका की अंदरूनी पोल, खबरों के बहाने खोलता है।

इसकी भूमिका में ब्लॉग स्वामी का कहना है कि हमारे देश भारत के नागरिक अपने देश की बुराईयों, अपराधों, गरीबी, अश्लीलता, गैर-कानूनी कार्यों, घूसखोरी, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी की जी भर भर्त्सना करते हैं और तुलना के लिये तथाकथित विकसित देशों के उदाहरण देते हैं। … न्यूयॉर्क के फुटपाथों पर हजारों लोग, भूखे पेट सोते है … अमेरिका ने अपने नागरिकों को मुम्बई के मैन-होल से बचने की सलाह जारी की, जबकि स्वयं अमेरिका में भीषणतम बाढ़ आयी थी … हाहाकार मचा हुया था।

आश्चर्य मुझे तब हुया जब मैंने इसे ब्लॉगवाणी पर नहीं पाया। मैंने सोचा कि शायद इसे वहाँ रजिस्टर्ड नहीं किया गया होगा। लेकिन पिछले दिनों वकीलों से पंगा न लेने जैसी टिप्पणियाँ उछलीं तो कतिपय व्यक्तियों से हुये ई-मेल संवाद में यह सामने आया कि इस ये कहाँ आ गये हम ब्लॉग को ब्लॉगवाणी जान-बूझ कर शामिल नहीं कर रहा। कारण बताया जा रहा कि इस तरह के ब्लॉग को शामिल न करने की नीति है। मुझे हैरानी हुई। क्योंकि एक सामान्य से ब्लॉग के लिए पहले कभी ऐसा न देखा न सुना।

बात आई गई हो गई थी किन्तु कल जब ब्लॉगवाणी पर खुलेआम माँ-बहन की गालियों से सुसज्जित वीडियो वाली एक पोस्ट को धड़ल्ले से आसन जमाये देखा तो मुझे फिर सोचना पड़ा कि आखिर यह तानाशाही क्यों? आखिर ऐसा क्या है इस ब्लॉग में जिसे ब्लॉगवाणी ने अपनाने से इंकार कर दिया? क्या ऐसी तानाशाही एक ब्लॉग एग्रीगेटर की होनी चाहिए? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ढ़ोल खोखला है?

ब्लॉगवाणी के इतिहास को ध्यान में देखा जाये तो यह संभावना है कि इस पोस्ट या ब्लॉग को ब्लॉगवाणी से हटा दिया जाये। इसलिए इसके वहाँ होने का स्नैपशॉट लेने की तैयारी कर चुका हूँ, बांटने की भी।

क्या ब्लॉगवाणी इस मुद्दे पर कुछ कहेगा!?

07 July, 2009

आईये आईये माँ बहन की गालियाँ सुनिए, खुलेआम: सौजन्य ब्लॉगवाणी

क्या ब्लॉग एग्रीगेटर पर कुछ भी उपलब्ध हो सकता है।

अभी अभी मैं पहुँचा ब्लॉगवाणी के सौजन्य से महाशक्ति के ब्लॉग पर्।

जो देखा सुना। आप भी देखिए।

धयान रहे इसकी आवाज़ कोई और ना सुन बैठे वरना आपकी माँ-बहन भी …

देखिए उस ब्लॉग को

धन्य हो महाशक्ति।

28 June, 2009

ऐसा क्या था इस टिप्पणी में जो इसे प्रकाशित करने में डर लगा?

अभी कुछ दिन पहले एक पोस्ट दिखी थी जिसमें हिंदी ब्लॉगिंग पर लगातार किए जा रहे कटाक्ष को देखते हुये कुछ तुकबंदी की थी। टिप्पाणी करने वालों ने उस पर तरह तरह के कयास लगाये। उसमें एक जगह यह भी कहा गया था कि जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं। मुझे बड़ा अटपटा लगा था पूरा मामला। क्योंकि आधा-अधूरा ही समझ में आ सका था। मूरख जो ठहरा :-)

उसके बाद बड़ी वीरता दिखाते हुये अनामी -अनामी जैसा एक खेल शुरू हो गया। कभी कभी मोडेरेशन जैसी कराहट-चिल्लाहट सुनने लगी। हिंदी ब्लॉगिंग की देन कहे जाने वाले ब्लॉग पर आज जब हिंदी ब्लॉगरों पर थू-थू करती एक पोस्ट आयी तो मन और खिन्न हो गया। इसी सिलसिले में आपके सामने एक ऐसी टिप्पणी जाहिर कर रहा हूँ जिसे उस ब्लॉग के कर्ता-धर्ता ने बड़ी सफाई से प्रकाशित ही नहीं होने दिया। मेरी अप्रकाशित टिपाणी और उनका ईमेल में आया जवाब नीचे देखिए।

मैंने लिखा था:
आपने खुद statcounter नहीं लगाया हुया और दूसरों को सलाह दे रहीं। और रही बात abuse करने की तो आपकी एड़ियाँ घिस जायेंगी यह साबित करने में कि मुझ जैसे 59.95.183.227 आई पी एड्रेस वाले ने आपके साथ क्या दुर्व्यवहार किया है।

यदि इतना ही माद्दा रखती हैं तो क्यों गिड़गिड़ाती हैं किसी के सामने कि अपने ब्लॉग से फलां-फलां टिप्पणियाँ हटा लो? जाईये शिकायत कीजिये। साबित कीजिये। क्यों फोन करती हैं किसी को? क्यों मेल करती? क्यों अनाम बन कर टिप्पणी करती हैं फिर जब देखती हैं कि प्रतिक्रिया ही नहीं आयी तो बाद में कहती हैं कि वो टिप्पणी मेरी थी मैंने पीसी पर लॉगिन नहीं किया था इसलिये अनाम बन कर टिप्पणी की, अब नाम बता रही हूँ। पता नहीं कितनी जगह तो आपने बताया ही नहीं। आग लगा कर तमाशा देखते रहे आप।

ये नहीं समझ आता कि आपका भी आई पी कोई देख रहा होगा?

और हाँ ज़रूरत पड़े तो बताईयेगा। अपना पता यहीं लिख देता हूँ। वैसे मैं इस वक्त दुर्ग में हूँ।

उनका जवाब आया ईमेल में:
i counot find any email id on your blog and neither in this comment so where should i contact you . and as conversations on phone and email i am happy that with this comment of yours i can 2+2 and i do record the converstations so that what i spoke i remember
as regds stat counter its for people who want to use it i will if i want please so what is the point in tellingme my ip address is under survilence i am aware of it
rachna

यह टिप्पणी इस पोस्ट पर की गई थी।

अब इसे रोके जाने के कितने कारण होंगे, आप बताईये