08 July, 2009

एक ऐसा ब्लॉग जिसे ब्लॉगवाणी ने अपनाने से इंकार कर दिया

इस ब्लॉग को पिछले कई दिनों से देख रहा हूँ। हालांकि इस पर पहुँचा था मैं गूगल से। सर्च कर रहा था "अमेरिकी इतिहास" तो 4 लाख सर्च परिणामों में यह सातवें नम्बर पर दिखा। आज शायद पांचवें नम्बर पर है। एक सीधा सादा सा जानकारी परक ब्लॉग अमेरिका की अंदरूनी पोल, खबरों के बहाने खोलता है।

इसकी भूमिका में ब्लॉग स्वामी का कहना है कि हमारे देश भारत के नागरिक अपने देश की बुराईयों, अपराधों, गरीबी, अश्लीलता, गैर-कानूनी कार्यों, घूसखोरी, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी की जी भर भर्त्सना करते हैं और तुलना के लिये तथाकथित विकसित देशों के उदाहरण देते हैं। … न्यूयॉर्क के फुटपाथों पर हजारों लोग, भूखे पेट सोते है … अमेरिका ने अपने नागरिकों को मुम्बई के मैन-होल से बचने की सलाह जारी की, जबकि स्वयं अमेरिका में भीषणतम बाढ़ आयी थी … हाहाकार मचा हुया था।

आश्चर्य मुझे तब हुया जब मैंने इसे ब्लॉगवाणी पर नहीं पाया। मैंने सोचा कि शायद इसे वहाँ रजिस्टर्ड नहीं किया गया होगा। लेकिन पिछले दिनों वकीलों से पंगा न लेने जैसी टिप्पणियाँ उछलीं तो कतिपय व्यक्तियों से हुये ई-मेल संवाद में यह सामने आया कि इस ये कहाँ आ गये हम ब्लॉग को ब्लॉगवाणी जान-बूझ कर शामिल नहीं कर रहा। कारण बताया जा रहा कि इस तरह के ब्लॉग को शामिल न करने की नीति है। मुझे हैरानी हुई। क्योंकि एक सामान्य से ब्लॉग के लिए पहले कभी ऐसा न देखा न सुना।

बात आई गई हो गई थी किन्तु कल जब ब्लॉगवाणी पर खुलेआम माँ-बहन की गालियों से सुसज्जित वीडियो वाली एक पोस्ट को धड़ल्ले से आसन जमाये देखा तो मुझे फिर सोचना पड़ा कि आखिर यह तानाशाही क्यों? आखिर ऐसा क्या है इस ब्लॉग में जिसे ब्लॉगवाणी ने अपनाने से इंकार कर दिया? क्या ऐसी तानाशाही एक ब्लॉग एग्रीगेटर की होनी चाहिए? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ढ़ोल खोखला है?

ब्लॉगवाणी के इतिहास को ध्यान में देखा जाये तो यह संभावना है कि इस पोस्ट या ब्लॉग को ब्लॉगवाणी से हटा दिया जाये। इसलिए इसके वहाँ होने का स्नैपशॉट लेने की तैयारी कर चुका हूँ, बांटने की भी।

क्या ब्लॉगवाणी इस मुद्दे पर कुछ कहेगा!?

25 comments:

Anonymous said...

ब्लागवाणी तेजी से पतन के मार्ग पर है।

mahashakti said...
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mahashakti said...

प्रिय Anonymous तुम सही कह रहे हो क्‍योकि सारा चिट्ठाजगत तुम्‍हारे बल पर ही तो चल रहा है।

@ ज्ञान तुम तो पीछे ही पड़ गये हो, डोन्‍ट वरी , मै तुम्‍हारी चिन्‍ता का कोई हल खोजता हूँ।

ज्ञान said...

मेरा एक आग्रह है कि अनाम होकर टिप्पणी न करें। इसके बावजूद भी अनाम टिप्पणियाँ दी जाती हैं तो ध्यान रखें कि उनका पूरा डाटा मेरे पास इक्क्ठा रहेगा। ताकि सनद रहे किसी विवाद की स्थिति में।

@ mahashakti
मैं आप के पीछे नहीं पड़ा हूँ। आपकी अभिव्यक्ति अपनी जगह है। उसका अपना अलग व्यक्तिगत स्थान है।
बात हो रही है उसे एक सार्वजनिक मंच पर उजागर करने की और एक दूसरे ब्लॉग को जगह न देने की।

मेरी आपसे कोई अदावत नहीं है।

Anonymous said...

my point of view is that since blogvani is a private run organisation { service provider } who charges nothing from the bloggers its well with in their rights to reject or select whome they would be like to be on their roll . mr maithily is giving a serrvice for his love for hindi and i feel we should respect his desicion because blogvani is his babay .
in near future when aggregators will fail / busts or shut down even then we may continue to read thru searches on google etc . hope fully recession may not efct google or all this hupallulaa about bloging may finish before we can bait our eyelids
rachna

Anonymous said...

serrvice=service
babay = baby


Rachna

संजय बेंगाणी said...

हर एग्रीगेटर की अपनी नीतियाँ है. गरियाना गलत है. फिर हर चिट्ठे पर नजर रखना सम्भव भी नहीं.

ब्लॉगवाणी पर नहीं तो चिट्ठाजगत पर होगा, यानी किसी को रोक पाना तो सम्भव है नहीं.

ज्ञान said...

@ rachna

am raising this issue to find clarification from a public platform like aggregator, for the reasons behind the motto of not entertaining a harmless blog and accepting integration of a fully abused language post

with a public appearance there in no matter left it is a private run organisation or public limited. how can you justify their love for hindi by serving full of obscene language video?

and dont ask to charge mahashakti. he owns his own right of expression as an individual.

@ संजय बेंगाणी जी

नीतियाँ हैं तो कही प्रदर्शित हैं क्या? लगभग हर सार्वजनिक मंच पर, इंटरनेट पर भी नीतियाँ बतायी जाती हैं, दिखती हैं। ब्लॉगवाणी पर हैं तो बतायें आपका आभारी रहूँगा।

बिना नीति प्रदर्शन के एक-दो व्यक्तियों द्वारा एकाएक ऐसा निर्णय लेना जिससे हजारों लोग (ब्लॉगर) जुड़े हों, तानाशाही नहीं तो क्या है? क्या बाकी एग्रीगेटर भी ऐसा ही करते हैं?

रही बात निगाह न रख पाने की तो मैं सहमत हूँ आपकी बात से। किन्तु यदि कोई निगाह के सामने किसी को ले आये तो निगाहें फेर लेनी चाहिए क्या?

निगाह तो रखी जाती है ब्लॉगवाणी के द्वारा। मैं साबित कर सकता हूँ सही वक्त आने पर।

Suresh Chiplunkar said...

आप एक गम्भीर आरोप लगा रहे हैं… क्या आप पक्की तौर पर जानते हैं कि ब्लागवाणी ने इस ब्लाग को हटाया है? क्या आपके पास किसी की शिकायत आई थी इस सम्बन्ध में? क्या आपने उस ब्लाग मालिक से इस सम्बन्ध में सम्पर्क किया कि उसे इस बारे में कोई शिकायत है? पूरी बात स्पष्ट कीजिये… आपने कुछ ईमेल संवादों का भी जिक्र किया है, इसलिये बतौर सबूत वह पेश कीजिये कि किसने यह ब्लाग हटाने/हटवाने/धमकाने आदि के बारे में कुछ कहा हो, इस बार में आपने ब्लागवाणी की नीति का भी उल्लेख किया है, उसे भी सबूत के साथ पेश करें, ताकि मामला साफ़ हो सके। ब्लागवाणी पर इस तरह सीधे-सीधे इस प्रकार का आरोप लगाना गलत होगा… वैसे भी वह एक प्रायवेट एग्रीगेटर है… और पूर्व में भड़ास जैसे कुछ ब्लाग को वे बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं, लेकिन यह मामला अलग है इसलिये आप स्थिति और स्पष्ट करें…

Anonymous said...

i dont think blog vani will have the time to read all the blogs . there was time like you i had also complained to blogvani for removing subash bhadoriyas blog and in due course it got removed
i think it would be good if you can contact blogvani administrator and lodge your protest with them

and also you can try and contact the service provider on whose platform the blog is hosted and TRY YOUR LEVEL BEST to get the blog post removed or deleted , belive me all pf them do take abuse seriously

hindi is a issue with them but it would really help putting your complaint at right place


Rachna

PD said...
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PD said...

जहां तक मुझे पता है, ब्लौगवाणी ने अपने शुरूवाती दिनों में ही यह बात स्पष्ट कर दी थी कि वह एक निजी साईट है और उस पर दिखने वाले ब्लौगों के चयन का अधिकार पूरी तरह से ब्लौगवाणी के मालिकों के पास है..

अब अगर किसी ब्लौग को ब्लौगवाणी रखता है या हटाता है तो मुझे कोई एतराज नहीं है.. कल अगर मेरा ब्लौग ब्लौगवाणी पर दिखना बंद हो जाये तो मुझे भी कोई समस्या नहीं होगी.

ज्ञान said...

@ सुरेश चिपलूनकर जी, यदि आप मुझसे संबोधित हैं तो:

क्या आप पक्की तौर पर जानते हैं कि ब्लागवाणी ने इस ब्लाग को हटाया है?
मैंने अपने इस पोस्ट/ ब्लॉग को हटाये जाने वाली संभावना की बात लिखी है!

क्या आपके पास किसी की शिकायत आई थी इस सम्बन्ध में?
जी नहीं किसी की शिकायत नहीं आई

क्या आपने उस ब्लाग मालिक से इस सम्बन्ध में सम्पर्क किया कि उसे इस बारे में कोई शिकायत है?
जी नहीं मैंने सम्पर्क नहीं किया।

कुछ ईमेल संवादों का भी जिक्र किया है, इसलिये बतौर सबूत वह पेश कीजिये कि किसने यह ब्लाग हटाने/हटवाने/धमकाने आदि के बारे में कुछ कहा हो
'यह ब्लॉग' से अगर आपका तात्पर्य महाशक्ति वाले ब्लॉग से है तो ऐसा कोई ई-मेल संवाद, इस बारे में नहीं हुया है।

इस बार में आपने ब्लागवाणी की नीति का भी उल्लेख किया है, उसे भी सबूत के साथ पेश करें
मैंने ब्लॉगवाणी की नीति का उल्लेख नहीं किया है। मैं खुद चाहता हूँ कि यदि कोई नीति हो मैं भी देखूँ

और यह बार-बार प्राईवेट शब्द क्यों जोड़ा जा रहा है? निजी है तो भी क्या? निजता को सार्वजनिक मंच पर लाया जाता है क्या? यदि हाँ तो निजी शब्द का मतलब क्या हुया? निजता एक परिधि में होती है उसे लादा नहीं जाता किसी पर।

आपने समय निकाला टिप्पणी के लिए। धन्यवाद।
उचित स्पष्टीकरण के लिए पुन: आपकी सेवा में रहूँगा

@ rachna

मेरी किसी से कोई व्यक्तिगत खुंदक नहीं है, महाशक्ति से भी नहीं और ना ही मेरी किसी आस्था पर चोट पहुँची है।

एक सीधा सी जिज्ञासा है कि 'ये कहाँ आ गये हम' ब्लॉग पर ऐसा क्या है जिस पर एक एग्रीगेटर संचालक को आपत्ति है।

रही बात ब्लॉगवाणी के संचालकों से विरोध दर्शाने हेतु सम्पर्क करने की तो, यह पोस्ट जिसे अब तक 127 बार पढ़ा जा चुका है उनकी नज़रों में भी आई ही होगी। सार्वजनिक कार्यों की सार्वजनिक चर्चा ही होती है। इसके बाद भी यदि कोई प्रतिक्रिया नहीं!? तो जाने दीजिये। अपना कुछ बनना बिगड़ना तो है नहीं :-)

अब सिरिल जी जाने या मैथिली जी :-)

महाशक्ति का तू-तड़ाक के स्तर पर उतरना भी पसंद आया :-)

@ PD
आप जो ब्लॉगवाणी के शुरूआती दिनों की बात कह रहे हैं वह आज की तारीख में कहीं ब्लॉगवाणी पर ऐसी जगह मौज़ूद है क्या जहाँ आसानी से नज़र आ जाये?

Anonymous said...

रही बात ब्लॉगवाणी के संचालकों से विरोध दर्शाने हेतु सम्पर्क करने की तो, यह पोस्ट जिसे अब तक 127 बार पढ़ा जा चुका है उनकी नज़रों में भी आई ही होगी। सार्वजनिक कार्यों की सार्वजनिक चर्चा ही होती है। इसके बाद भी यदि कोई प्रतिक्रिया नहीं!? तो जाने दीजिये। अपना कुछ बनना बिगड़ना तो है नहीं :-)

This is the root cause of the system when there is a problem we ALL try to highlight a problem but NONE of us try to take remedial measure to sort the problem out in a ACCEPTABLE way . If you feel something wrong has happened and you want to raise your voice against it then KEEP DOING IT , BUT when you feel that its good enough how many times your GROUSE was read rather then the solution of the problem { because eiter way its not effecting you } Then with due respects to you Mr Gyan you are only trying to become popular without making any change in the system that you feel is wrong
Rachna

Mohammed Umar Kairanvi said...
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mahashakti said...
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Anonymous said...

ब्लागवाणी की पसंद तो घर की खेती है। जब चाहो जितनी बढ़ा लो और जिस की चाहो उस की रोक दो। आखिर निजी जो ठहरा।

Suresh Chiplunkar said...

कैरानवी जी, यदि हिन्दूवाणी नाम रखना होता तो कई और भी ब्लॉग चल रहे हैं, उन्हें क्यों रखा हुआ है ब्लागवाणी ने? सलीम अखतर, काशिफ़ आरिफ़, नीलोफ़र, स्वच्छ संदेश, मोहल्ला, जैसे कई और ब्लाग हैं… यदि ब्लागवाणी पक्षपाती होता तो ये भी बन्द हो जाते ना…

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

ब्लागवाणी पक्षपात भी करे तो क्या? निजि है।

ज्ञान said...

@ mahashakti बड़े खेद के साथ मैं आपकी टिपण्णी आंशिक रूप से हटा रहा हूँ क्योंकि मुझे अपनी इस पोस्ट के साथ सोनिया/ राहुल/ जा‍गीर/ मुस्लिम आरक्षण/ मुस्‍लमान/ आदि का तारतम्य समझ में नहीं आया.

शेष आपने जो लिखा है कि
मेरी जिस पोस्‍ट का आप विरोध कर रहे है उसे करीब . . .
तो एक बार फिर से आप देख लीजिये मैंने हर बार यह लिखा है कि मुझे आपसे, आपकी पोस्ट से कोई आपत्ति नहीं है, आपका अपना निजी स्थान अपने ब्लॉग पर है मेरी जिज्ञासा सिर्फ यही है कि ऐसी पोस्ट को स्थान देने के सापेक्ष 'ये कहाँ आ गए हम' ब्लॉग को स्थान क्यों नहीं. आप इसे बार बार अपने ऊपर क्यों ले रहे हैं?

@ Mohammed Umar Kairanvi
आपकी टिप्पणी भी हटा रहा हूँ क्योंकि बाक़ी सब ठीक है. ये हिन्दू मुस्लिम का मुद्दा नहीं है यहाँ.
जब आप कहते हैं कि
ब्लागवाणी को अपना नाम बदल लेना चाहिये इसे मेरी वाणी जैसा नाम अपना लेना चाहिये, इसके नियम ब्लागिंग हित में नहीं हैं
आपकी जानकारी के लिये बता दूं यह ब्लाग भी ब्लागवाणी पर नहीं हैं
antimawtar.blogspot.com
islaminhindi.blogspot.com

तो इसके नियम कहीं पढ़ने के लिए मिलें तो मुझे भी दिखायें. .

@ rachna
मुझे कोई problem नही है मुझे मात्र एक curiosity है

संदीप said...

वाह भाई लोगों, यहां चर्चा हो रही थी ब्‍लॉग एग्रीगेटर की नीतियों के संबंध में और आप यहां भी हिंदू-मुसलमान ले आए, गजब हैं आप लोग। हर सवाल का जवाब है आपके पास- हिंदू या मुसलमान। लगे रहिए। ज्ञान भाई, आपने सही सवाल उठाया।
वैसे मुझे ब्‍लॉगवाणी से फिलहाल ऐसी कोई शिकायत नहीं है।

venus kesari said...

मुझे भी आज तक ब्लोग्वानी से कोई शिकायत नहीं हुई

वीनस केसरी

Mansoor Ali said...

Blogvani ka role bahut mahatvpurn hai, ise vivado ke ghere me na laaye,balki bloggers apni soch ko durust kare.

Dhiraj Shah said...

blog ke sambandh me charcha honi chahiye

Mohammed Umar Kairanvi said...

ब्लागवाणी बलाग लगाये नहीं, आप टिप्पणी भी ना झेल सको, ऐसा भेदभाव फिर कैसे हो गया

Rank-2
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antimawtar.blogspot.com
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