13 August, 2009

क्युं इस ब्लोगर द्वारा तिरंगे का अपमान किया जा रहा

बहुत दुख होता है जब चीख चीख कर अपमान अपशब्द जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले तिरंगे की शान को बरकरार रख पाने में असफल हो जाते हैं। चलिये ठीक है देश प्रेम की भावना जोर मारती है फिर कहा जाता है तिरंगे की शान बनाये रखिये फिर एक ऐसा कोड दिखाया जाता है जिसकी कोई नकल करना चाहे तो आसानी से न कर पाये क्युंकि वह कोड का फोटो है कोड नहीं। अब अगर कोई उस तिरंगे पर कलिक करके उसे सीधा कोपी करना चाहे तो पता चलता है कि वह फोटु भी नहीं खुलती अधकचरा सा कुछ दिखता है जो बताता है कि यह लिन्क ही गलत है।

अब आने वाला अपना देश प्रेम कैसे दिखाये। क्या यह ऐसा नहीं कि तिरंगे को फहराने के लिये डोरी खींची और तिरंगा दन्न से नीचे आ गिरे यहां तिरंगे को क्लिक किया और तिरंगा गायब खुले ही ना

आप खुद देख लीजिये http://mypoeticresponse.blogspot.com पर

क्या यह देश के राष्ट्रीय झंडे का अपमान नहीं? क्या उनकी मरजी झंडे और देश से ऊपर है।

22 comments:

Anonymous said...

the code has been provided separately and most bloggers are intelligent enough to copy it see here also
if i go by your post then all the blogges are doing the same
see this and click tiranga here
http://mahendra-mishra1.blogspot.com/


we can protect the code and provide it separately also as has been done on the refred blog by you

hope this clarifies the issue which is technical

and it would be GREAT if you can provide a trinaga on your blog with a code which can be copied by others as you want it

after all your name is gyan

due regds
rachna

Ashish Khandelwal said...

यहां तिरंगे का अपमान कतई नहीं हुआ है। इस पोस्ट के जरिए न तो ध्वज संहिता-2002 में वर्णित किसी उपबंध का उल्लंघन हुआ है और न ही ऐसा कोई कृत्य हुआ है जिससे हिंदुस्तानियों का सिर शर्म से झुके। तिरंगे के रूप में देशभक्ति की भावना के प्रसार को इस संकुचित नजरिए से देखना किसी हिंदुस्तानी को शोभा नहीं देगा। हैपी ब्लॉगिंग.

Anonymous said...

and the post where you say the code is in pic also has a text code which you did not check

so my friend read my post again
and then write all that you want to

its important to read and follow the instructions
regds
rachna

संजय बेंगाणी said...

अब यहाँ अपमान कैसे हो गया? यह समझ में नहीं आया. मुझे नहीं लगता ब्लॉगर तिरंगे का अपमान कर रहा है. अगर आपके पास कुछ बेहतर कर सकने योग्य सुझाव हैं तो सीधे ब्लॉगर को भेजें और इसी तरह उनसे अपनी शंका का समाधान भी पा सकते है.

अच्छा लगा की तिरंगे के मान -अपमान के लिए सजग लोग हमारे आस पास है. ऐसे में इसकी शान कैसे कम हो सकती है.

ज्ञान said...

इसि लिये हिन्दी ब्लोगिंग को लोग दुत्कारते हैं जहां काउअदे कानून की बात कर असलि बात को धकेल दिया जाता है

ऊपर से तुर्रा ये कि एक तकनीक सक्षम देशप्रेमी भी समझ नहीं पा रहा कि झंडे पर क्लिक करने पर क्या होना चाहिये अगर क्ल्कि करने की सुविधा हओ तो

महेन्द्र मिश्रा जी के ब्लॉग पर लगे झंडे को ही क्लिका लो आप लोग्। शर्म आनी चाहिये दूसरों को गलत ठहराते

ज्ञान said...

संजय जी एक लाइन के खिसक जाने से आहत होते हैं यहाँ तो राष्ट्रीय गौरव ही गायब हो रहा है

Anonymous said...

महेन्द्र मिश्रा जी के ब्लॉग पर लगे झंडे को ही क्लिका लो आप लोग्। शर्म आनी चाहिये दूसरों को गलत ठहराते

WHAT HAPPENS THERE CAN YOU EXPLAIN
HE HAS ALSO TAKEN THE TEXT CODE FROM MY BLOG

Rachna

ज्ञान said...

इसी क्षण से मैं अनामी टिप्पणियां बंद कर रहा क्युंकि मुझे लग रहा कि रचना जी के नाम से सच में कोई और कमेन्ट कर रहा। रचना जि इतनी अपरिप्क्व नहीं हो सकती। रही बात क्या हो गया क्लिकाने पर तो अफसोस। कोई नहीं समझता तो जाने दो अपने को क्या

संगीता पुरी said...

मैने भी तो झंडे को फहराया है .. अपने ब्‍लाग पर .. इसी कोड को .. कोई दिक्‍कत नहीं आयी !!

ज्ञान said...

संगीता जी आप तो ज्योतिषी हैं। झंडे को क्लिक कर फहराईये फिर बताईये

गुरतुर गोठ said...

का बर झगरा करत हव जी. जनता ला जीवन खान दौ अउ तिरंगा ला फहरन दौ.

रंजन said...

भाई मुझे भी समझ नहीं आया कि कैसे अपमान हो गया.. हमें तो सही दिख रहा है..

वंदे मातरम

अर्शिया अली said...

जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई.
( Treasurer-S. T. )

Santosh said...

भाई अगर झंडा फहर रहा है तो फिर उसे क्लिक करने की क्या ज़रुरत है? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप अपने स्कूल के दिनों में स्कूल के सामने फहर रहे झंडे को सोंटी मारते थे?

ज्ञान said...

वाह गुमनाम संतोष भाई, अगर किसी वेब पेज पर आपके ईष्ट देव या माता-पिता की तस्वीर हो और उसे क्लिक कर दूसरी विंडो में खोल कर कॉपी करने के लिये आप क्लिक या राईट क्लिक करें तो मैं भी ऐसा सोंटी मारने वाला मजाक करूँ?
लाल पीले तो नहीं होंगे ना?

ये मजाक की बात नहीं है, तकनीक की बात झै।
हरेक को समझ में आ जाये जरूरी नहीं

Ratan Singh Shekhawat said...

भाई हमारे तो यह समझ से परे की बात रही ! आप ज्ञान है शायद सही ही कह रहे होंगे !

RC Mishra said...

सही लिन्क है "http://rachnadesign.googlepages.com/india_flag.gif" और "http://xn--rachnadesigngooglepages-bv8b.com/india_flag.gif" गलती से वहाँ लगा है|
कारण कि यू आर आइ को कॉपी/पेस्ट करने मे या टाइप करने मे उसके बीच कुछ यूनिकोडित करेक्टर आ गये थे, जिस कारण xn--, .com के पहले bv8b आ गये और design के बाद वाला . गायब हो गया।

रचना को कोड मे हुई ये गलती सुधार लेनी चाहिये। और जिन लोगों ने लगाया है उनको भी, या लिन्क ही हटा देना चाहिये, जिससे किसी को असुविधा न हो।

Santosh said...

ओह..हमें क्या पता कि आप झंडे में अपने माता-पिता की तलाश करते हैं. तब तो ठीक है. तलाश जारी रखें.
ज्ञानियों के साथ यही समस्या है. वे हर बात में तकनीक खोजते रहते हैं. माता-पिता की फोटो में भी.

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said...

तिरंगे का अपमान तो हमारे बच्चू को पढाई जाने वाली किताबे कर रही है हमारे लखनऊ में आज अमर उजाला अखबार में यह खबर छपी थी कि एक स्कूल में पढाई जाने वाली एक प्रकाशन की किताब जो कि पहले दर्जे के बच्चो को पढाई जाती है में तिरंगे का रंग ही उल्टा था

सबसे ऊपर हरा
सबसे नीचे केसरिया

अफ़सोस

ज्ञान said...

वाह RC Mishra jii आप पकड पाये मेरी बात को । उधर ब्लॉग पर भी चुपके से कोड बदल दिया गया है। अब सब कुछ ठीक है। आपका धनयवाद।

मेरी आपत्ति को हवा में उड़ा देने वालों के लिये:
उसी ब्लॉग पर मेरी ही बातों का समर्थन करने वाली लाइने वहां दिखी उठा कर यहां रख रहा ki-

आपति दर्ज करना जरुरी होता हैं । कुछ हिन्दी ब्लॉगर आपत्ति दर्ज कराने वालो को "आपत्तिजनक " मानते हैं कोई बात नहीं कुछ और समय बाद वो ख़ुद समझ जायेगे की ब्लोगिंग का सही अर्थ हैं ग़लत के खिलाफ अपनी आवाज को दूसरो तक पहुचना ।
ब्लोगिंग एक ऐसा मंच हैं जहाँ आप जो ग़लत लगे उसको लिख कर अपने साथ खडे हो सकने
वाले लोगो का साथ ढूंड सकते हैं । और कोई साथ खड़ा हो ना हो "संजय " की तरह अपना
विरोध दर्ज कराने मे कोई उज्र नहीं होना चाहिये । जो ग़लत हैं उसका विरोध होना ही चाहिये ।
हर विरोध अपने अन्दर एक आग लिये होता हैं और अमूनन विरोध करने वाले बहुत भावुक
होते हैं । ब्लोगिंग केवल साहित्य रचने का या हँसी मखोल का ही साधन नहीं नहीं हैं { वो
करते रहे जिन्हे करना हैं कोई आपत्ति नहीं हैं !!!!! }


बस यही बात मैं भी कहना चाहता था

मेरा संदेश संबंधित व्यक्तियों तक पहूंच गया है असा मेरा सोचना है

डा. अमर कुमार said...


झँडा फ़हराने से पहले ही डँडा चल गया..
चलिये, मुझे भरोसा हो रहा है कि, हम स्वाधीन हो रहे हैं ?

भले देशप्रेमियों अपने तिरँगे में चक्कर की अवधारणा किसने रखी थी.. जरा आओ खुल्ले में !

बी एस पाबला said...

हमने भी इशारा किया था फिर मेल-मुलाकात में बात बनती न देख धन्यवाद कह निकल लिए थे

अंत भला सब भला