16 July, 2009

दीपक भारतदीप 8वीं वरीयता/ रैंकिंग के मामले में झूठ क्यों बोल रहे?

कई दिन से देख रहा था कि दीपक भारतीय लिख रहे हैं कि उनके ब्लॉग के साईड बार में जो एलेक्सा का प्रमाणपत्र लगा है उसे कहीं से कोई चुनौती नहीं मिली यह दुनियां की आठवीं वरीयता प्राप्त ब्लाग/पत्रिका है इस पर अब बहस की गुंजायश नहींआदि आदि।


नीचे चार चित्र दिये गये हैं। पहला चिट्ठाचर्चा ब्लॉग का है, दूसरा मेरे ब्लॉग का है, तीसरा निशांत के ब्लॉग का और चौथा दीपक भारतदीप के ब्लॉग का है। चारों में URL, Traffic Rank, Average time on blog आदि देखें और बतायें कौन कितने पानी में है।

चित्रों को क्लिक कर बड़ा किया जा सकता है।

चिट्ठाचर्चा के बारे में


मेरे ब्लॉग के बारे में



निशांत के हिंदीज़ेन ब्लॉग के बारे में


दीपक भारतदीप के ब्लॉग की हालत

यदि वे खुद नहीं मानते तो यह क्यों कह रहे कि अब इसमें बहस की गुंजायश नहीं? अलेक्सा की बात करते हैं वरीयता बताते हैं तो अलेक्सा की लिंक का उल्लेख करें यूआरएलट्रेन्ड्ज़ की लिंक को क्यों उद्धृत करते हैं? उन्हीं के ब्लॉग पर अलेक्सा का हो विजेट लगाया गया है उस पर क्लिक किये जाने पर भी यहां का आखिरी चित्र दिखाई देता है।

ये सभी चित्र http://www.alexa.com/siteinfo/ पर संबंधित ब्लॉग की लिंक डाल कर लिए गये हैं। आप भी अपने ब्लॉग की लिंक डाल कर देख सकते हैं कि दीपक भारतदीप कितना सच बोल रहे हैं।

11 July, 2009

संजय बेंगानी जी! गर्व से कहना और नाज़ करना अलग अलग चीजें हैं

छत्तीसगढ़ वासी हूँ इसलिए बात जरा लग गई है। संजय बेंगानी जी ने पता नहीं किस मूड में रवि रतलामी जी के रायपुर प्रवास पर लिखी गई एक पोस्ट पर लिख मारा है कि 'आप कहते हो नाज है तो होगा, वैसे जब अखबारों में महान चिट्ठों के बारे में लिखते हैं हमें रवि रतलामी का चिट्ठा कहीं नहीं दिखता. आप समझ रहें हैं मेरी बात?'

अब हम ठहरे मूरख। हमने भागदौड़ करने की बजाय गूगल पर ही सर्च मारा। नतीजा क्या आया देखिए:

raviratlami के लिए लगभग 359,000
sanjay bengani के लिए लगभग 70,400

रवि रतलामी के लिए लगभग 80,200
संजय बेंगानी के लिए लगभग 1,700

रवि रतलामी के ब्लॉग छींटें और बौछारें के लिए लगभग 176,000
संजय बेंगानी के ब्लॉग जोगलिखी के लिए लगभग 126,000

और
रवि के लिए लगभग 10,700,000
संजय के लिए लगभग 737,000

वैसे भी R, S के पहले आता है। समझ गये ना बात को?

अब भी कोई कसर बाकी है तो अपने प्रदेश के बाहर के समाचार पत्रों में अपने ब्लॉग का उल्लेख करने वाली कतरनें सामने लाईये। छत्तीसगढ़ से बाहर के समाचार पत्रों में रवि जी के ब्लॉग का उल्लेख करने वाली कतरनें हम ला देंगें।

गर्व से कहना और नाज़ करना अलग अलग है श्रीमान

08 July, 2009

एक ऐसा ब्लॉग जिसे ब्लॉगवाणी ने अपनाने से इंकार कर दिया

इस ब्लॉग को पिछले कई दिनों से देख रहा हूँ। हालांकि इस पर पहुँचा था मैं गूगल से। सर्च कर रहा था "अमेरिकी इतिहास" तो 4 लाख सर्च परिणामों में यह सातवें नम्बर पर दिखा। आज शायद पांचवें नम्बर पर है। एक सीधा सादा सा जानकारी परक ब्लॉग अमेरिका की अंदरूनी पोल, खबरों के बहाने खोलता है।

इसकी भूमिका में ब्लॉग स्वामी का कहना है कि हमारे देश भारत के नागरिक अपने देश की बुराईयों, अपराधों, गरीबी, अश्लीलता, गैर-कानूनी कार्यों, घूसखोरी, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी की जी भर भर्त्सना करते हैं और तुलना के लिये तथाकथित विकसित देशों के उदाहरण देते हैं। … न्यूयॉर्क के फुटपाथों पर हजारों लोग, भूखे पेट सोते है … अमेरिका ने अपने नागरिकों को मुम्बई के मैन-होल से बचने की सलाह जारी की, जबकि स्वयं अमेरिका में भीषणतम बाढ़ आयी थी … हाहाकार मचा हुया था।

आश्चर्य मुझे तब हुया जब मैंने इसे ब्लॉगवाणी पर नहीं पाया। मैंने सोचा कि शायद इसे वहाँ रजिस्टर्ड नहीं किया गया होगा। लेकिन पिछले दिनों वकीलों से पंगा न लेने जैसी टिप्पणियाँ उछलीं तो कतिपय व्यक्तियों से हुये ई-मेल संवाद में यह सामने आया कि इस ये कहाँ आ गये हम ब्लॉग को ब्लॉगवाणी जान-बूझ कर शामिल नहीं कर रहा। कारण बताया जा रहा कि इस तरह के ब्लॉग को शामिल न करने की नीति है। मुझे हैरानी हुई। क्योंकि एक सामान्य से ब्लॉग के लिए पहले कभी ऐसा न देखा न सुना।

बात आई गई हो गई थी किन्तु कल जब ब्लॉगवाणी पर खुलेआम माँ-बहन की गालियों से सुसज्जित वीडियो वाली एक पोस्ट को धड़ल्ले से आसन जमाये देखा तो मुझे फिर सोचना पड़ा कि आखिर यह तानाशाही क्यों? आखिर ऐसा क्या है इस ब्लॉग में जिसे ब्लॉगवाणी ने अपनाने से इंकार कर दिया? क्या ऐसी तानाशाही एक ब्लॉग एग्रीगेटर की होनी चाहिए? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ढ़ोल खोखला है?

ब्लॉगवाणी के इतिहास को ध्यान में देखा जाये तो यह संभावना है कि इस पोस्ट या ब्लॉग को ब्लॉगवाणी से हटा दिया जाये। इसलिए इसके वहाँ होने का स्नैपशॉट लेने की तैयारी कर चुका हूँ, बांटने की भी।

क्या ब्लॉगवाणी इस मुद्दे पर कुछ कहेगा!?

07 July, 2009

आईये आईये माँ बहन की गालियाँ सुनिए, खुलेआम: सौजन्य ब्लॉगवाणी

क्या ब्लॉग एग्रीगेटर पर कुछ भी उपलब्ध हो सकता है।

अभी अभी मैं पहुँचा ब्लॉगवाणी के सौजन्य से महाशक्ति के ब्लॉग पर्।

जो देखा सुना। आप भी देखिए।

धयान रहे इसकी आवाज़ कोई और ना सुन बैठे वरना आपकी माँ-बहन भी …

देखिए उस ब्लॉग को

धन्य हो महाशक्ति।

28 June, 2009

ऐसा क्या था इस टिप्पणी में जो इसे प्रकाशित करने में डर लगा?

अभी कुछ दिन पहले एक पोस्ट दिखी थी जिसमें हिंदी ब्लॉगिंग पर लगातार किए जा रहे कटाक्ष को देखते हुये कुछ तुकबंदी की थी। टिप्पाणी करने वालों ने उस पर तरह तरह के कयास लगाये। उसमें एक जगह यह भी कहा गया था कि जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं। मुझे बड़ा अटपटा लगा था पूरा मामला। क्योंकि आधा-अधूरा ही समझ में आ सका था। मूरख जो ठहरा :-)

उसके बाद बड़ी वीरता दिखाते हुये अनामी -अनामी जैसा एक खेल शुरू हो गया। कभी कभी मोडेरेशन जैसी कराहट-चिल्लाहट सुनने लगी। हिंदी ब्लॉगिंग की देन कहे जाने वाले ब्लॉग पर आज जब हिंदी ब्लॉगरों पर थू-थू करती एक पोस्ट आयी तो मन और खिन्न हो गया। इसी सिलसिले में आपके सामने एक ऐसी टिप्पणी जाहिर कर रहा हूँ जिसे उस ब्लॉग के कर्ता-धर्ता ने बड़ी सफाई से प्रकाशित ही नहीं होने दिया। मेरी अप्रकाशित टिपाणी और उनका ईमेल में आया जवाब नीचे देखिए।

मैंने लिखा था:
आपने खुद statcounter नहीं लगाया हुया और दूसरों को सलाह दे रहीं। और रही बात abuse करने की तो आपकी एड़ियाँ घिस जायेंगी यह साबित करने में कि मुझ जैसे 59.95.183.227 आई पी एड्रेस वाले ने आपके साथ क्या दुर्व्यवहार किया है।

यदि इतना ही माद्दा रखती हैं तो क्यों गिड़गिड़ाती हैं किसी के सामने कि अपने ब्लॉग से फलां-फलां टिप्पणियाँ हटा लो? जाईये शिकायत कीजिये। साबित कीजिये। क्यों फोन करती हैं किसी को? क्यों मेल करती? क्यों अनाम बन कर टिप्पणी करती हैं फिर जब देखती हैं कि प्रतिक्रिया ही नहीं आयी तो बाद में कहती हैं कि वो टिप्पणी मेरी थी मैंने पीसी पर लॉगिन नहीं किया था इसलिये अनाम बन कर टिप्पणी की, अब नाम बता रही हूँ। पता नहीं कितनी जगह तो आपने बताया ही नहीं। आग लगा कर तमाशा देखते रहे आप।

ये नहीं समझ आता कि आपका भी आई पी कोई देख रहा होगा?

और हाँ ज़रूरत पड़े तो बताईयेगा। अपना पता यहीं लिख देता हूँ। वैसे मैं इस वक्त दुर्ग में हूँ।

उनका जवाब आया ईमेल में:
i counot find any email id on your blog and neither in this comment so where should i contact you . and as conversations on phone and email i am happy that with this comment of yours i can 2+2 and i do record the converstations so that what i spoke i remember
as regds stat counter its for people who want to use it i will if i want please so what is the point in tellingme my ip address is under survilence i am aware of it
rachna

यह टिप्पणी इस पोस्ट पर की गई थी।

अब इसे रोके जाने के कितने कारण होंगे, आप बताईये

27 May, 2009

नये ब्लॉग बनाने वालों को वरिष्ठ ब्लॉगर गलत जानकारी क्यों दे रहे?

अक्सर ही मुझे आलोचना झेलनी पड़ती है कि आप अच्छी बातों की ओर ध्यान क्यों नहीं देते। मेरा यह कहना रहा है कि गलत बात या भ्रम में डाले जाने वाली बातों को पचा जाना किसी को पसंद आता होगा मुझे नहीं आता। कई दिनों से अपने आप को रोक रहा था कि कोई विवाद न खड़ा हो जाये लेकिन कल मेरे सब्र का बांध टूट गया जब एक समूह में इक्कठा हुये चंद लोग मुझ पर लट्ठ लेकर पिल पड़े कि ब्लॉग बनाने के लिए जीमेल का खाता ज़रूरी है। हम कितने ईमेल आई डी याद रखें?

मैं समझाते रह गया कि जीमेल का खाता कतई ज़रूरी नहीं लेकिन कोई मानने को तैयार ही नहीं था। सभी इलाहाबाद की ताज़ा ताज़ा हुयी ब्लॉगिंग सम्मेलन में कही गयी बातों को पत्थर की लकीर मानते हुये कह रहे थे कि इतने बड़े बड़े पुराने धुरंधर आये हुये थे, वे सब क्या गलत कह रहे हैं या गलत बात का समर्थन कर रहे?

मैं झुंझलाया सा यहीं नेहरू नगर में रूक गया। एक दोस्त के घर उसी के सामने याहू पर एक खाता बनाया और उसी से ब्लॉगस्पॉट पर एक ब्लॉग बनाया। फिर उन सभी को एक एक कर लिंक भेजी उस ब्लॉग की। कुछ ने देख ली, कुछ देख कर आज शाम ग्रैंड ढिल्लों होटल में एक तरल पार्टी का इंतज़ाम कर रहे हैं। आखिर शर्त ही यही लगी थी।

याहू के खाते murakhmail@yahoo.com से ही उस ब्लॉग में लागिन किया जाता है।
ब्लॉग का नाम है दूसरे मेल आई डी से बना ब्लॉग
ब्लॉग का पता है http://yahoomailid.blogspot.com/
प्रोफाईल में भी इस याहू आईडी को देखा जा सकता है देखिये http://www.blogger.com/profile/07855006421064341073

आप आयेंगे उस पार्टी में, मुफ्त की मिलेगी।



जिस बात के विरोध में यह सब हुया उसकी कुछ लिंक और चित्र नीचे हैं, इलाहाबाद सम्मेलन के

17 May, 2009

ये कहें तो मजाक, वो कहें तो जाहिल: ये है हिन्दी ब्लॉगिंग की देन

बस पाँचेक मिनट पहले ही जब मैंने देखा तो फिर दंग रह गया। एक ब्लॉगर ने दूसरे ब्लॉगर को उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करने पर जाहिल कह दिया, जिन शब्दों का इस्तेमाल करने पर ठिठोली करना कह कर पल्ला छाड़ लिया जाता है।

खुद ही देखिये ठिठोली वाले ब्लॉगर 

इसका जवाब -ठिठोली

खुद ही देखिये जाहिल ब्लॉगर

प्रतिक्रिया - पढ़े लिखे जाहिल

प्रति-प्रतिक्रिया - स्नेह से

ये है हिन्दी ब्लॉगिंग की देन