01 December, 2008

शहीद के पिता ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री से कहा "कुत्तो निकल जाओ यहां से।”

मज़बूरी है, परिवार के साथ बैठा हूँ, इसलिए अपने आपको नियंत्रित कर रखा है,  वरना इतनी गालियाँ देने को मन कर रहा है कि …
 
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मुम्बई में ताज होटल में आतंकवादियों से संघर्ष में शहीद हुए युवा मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता के. उन्नीकृष्णन ने आज केरल के मुख्यमंत्री तथा गृहमंत्री को अपने घर से निकाल दिया और उनसे मिलने से इनकार कर दिया। दुख और गुस्से से बौराए पिता ने पहले तो घर का दरवाजा ही नहीं खोला और आधे घंटे तक मुख्यमंत्री अच्युतानंद और उनके गृहमंत्री अपने सुरक्षा कर्मियों और साथ आए अन्य लोगों के साथ बाहर इंतजार करते रहे। 

जब श्री उन्नीकृष्णन के सब्र का बांध टूट गया तो वे झपटते हुए बाहर आए, उपस्थित पत्रकारों से कहा “चलाओ कैमरा” और फिर सबके सामने दोनों मंत्रियों से भड़कते हुए कहा “कुत्तो निकल जाओ यहां से।” 

मेजर संदीप की शहादत पर केरल सरकार ने अब तक चुप्पी साध रखी थी। यहां तक कि शनिवार को उनके अंतिम संस्कार के समय भी केरल सरकार की ओर से एक शब्द भी शोकस्वरूप नहीं कहा गया था। श्री के. उन्नीकृष्णन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी खबरों में यह भी कहा गया कि उन्होंने यह तक कह डाला कि अगर उनके बेटे की मौत पर राजनीति की गई तो वे आत्महत्या कर लेंगे। 
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घर से बाहर जा रहा हूँ, ऐसी जगह जहाँ जी भर कर अपनी भड़ास निकाल सकूँ।

8 comments:

आदर्श राठौर said...

जनाब बाहर गाली देने से कुछ नहीं होगा,
कुछ और सोचना होगा हमें...........
अब बहुत हो गया........

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

bahut sai bhagaya in netaao ko shaheed ke pita ne . inke sath isi tarah ka vyavahaar kiya jana chahiye. shaheedo ke prati sarakaro ko apne vichaar badalna onge.

COMMON MAN said...

काश हम सब लोग यह कर पायें.

परमजीत बाली said...

इन को इसी तरह लताड़ना चाहिए।सहि कहा है उन्हों नें।

Pt. D.K.Sharma "Vatsa" said...

काश चुनावों के समय सारा राष्ट्र कह सके ""कुत्तो निकल जाओ यहां से।”"

jiyo aur jine do said...

father of sandip did right but the way of expression may be more sofesticated.

epatra2vivek said...

Indeed father and son both are brave men " As Father, As Son"

indianrj said...

Did Kerala CM expect some kind of welcome from the father of Major Sandeep? If he doesn't feel the state-of-mind of a father who had lost his only son just two days before, we can feel pity for the people of Kerala for having such insensitive Head of State!