17 May, 2009

ये कहें तो मजाक, वो कहें तो जाहिल: ये है हिन्दी ब्लॉगिंग की देन

बस पाँचेक मिनट पहले ही जब मैंने देखा तो फिर दंग रह गया। एक ब्लॉगर ने दूसरे ब्लॉगर को उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करने पर जाहिल कह दिया, जिन शब्दों का इस्तेमाल करने पर ठिठोली करना कह कर पल्ला छाड़ लिया जाता है।

खुद ही देखिये ठिठोली वाले ब्लॉगर 

इसका जवाब -ठिठोली

खुद ही देखिये जाहिल ब्लॉगर

प्रतिक्रिया - पढ़े लिखे जाहिल

प्रति-प्रतिक्रिया - स्नेह से

ये है हिन्दी ब्लॉगिंग की देन

12 comments:

नितिन व्यास said...

बढ़िया!! आप काफी बारीकी से चिठ्ठों को पढ़ते है,

Rachna Singh said...

(1) - क्यूँ दुबले
its a proverb where i hv not used aap tum mae ham or any other word which would have made it a personal comment
(2) - क्यूँ दुबले
saneer and i have a well formed realtionship , he also writes abt me in good nature on hi sblog

इसका जवाब -ठिठोली
same reply as in section 2
खुद ही देखिये जाहिल ब्लॉगर(1) - और दुबली
आप इसकी चिंता में और दुबली मत होईये !
it is a personal comment as it has refrence to aap and aur dubli
for opther tree points my comment is sufficent on my blog
hope this clarifys the issue if there is still any mental turbulence on the same do keep writing and i will be benovalent enough to comment and clarify

Anonymous said...

kash aisa hi benovalent enough to comment and clarify pichhali angon vali post ka bhi ho jata

बी एस पाबला said...

अनूप के लिये तो ये यही कहूँगी काजी जी क्यूँ दुबले शहर के अंदेशे से ।

kya ye personal nahin hai?

Rachna Singh said...
This comment has been removed by the author.
Rachna Singh said...

रही बात रचनाजी की बात का जबाब देने की तो हमारी समझ में हर बात का जबाब देना भी कोई अच्छी बात नहीं होती। बहुत बार कोई जबाब न देना भी एक जबाब होता है। और अगर बहुतै मन हुड़क रहा है जबाब देने का तो एक जबाब ये दिया जा सकता है रचना जी की इस बात का जबाब मैं अपनी चार सौवीं पोस्ट लिखने के बाद दूंगा।
b s pabla this was mr anups comment so i replied अनूप के लिये तो ये यही कहूँगी काजी जी क्यूँ दुबले शहर के अंदेशे से ।

Rachna Singh said...

and folks if there are any other comments then for my replies please bear with me till morning and since i dont opt for email follow up if its urgent you can surely email me
good night for now

Arvind Mishra said...

इस मसले को यहाँ उठा कर अपने नीर क्षीर निर्णय की भूमिका बनाई -अच्छा लगा !
मैं तो स्तब्ध हूं ! अगर ऐसे ही लोगों को तवज्जो मिलती गयी तो हिन्दी ब्लागिंग का भविष्य निश्चित ही अंधकारमय है ! अधिक क्या कहूं ?

Rachna Singh said...

अगर ऐसे ही लोगों को तवज्जो मिलती गयी तो हिन्दी ब्लागिंग का भविष्य निश्चित ही अंधकारमय है !

आप सीधा हिन्दी ब्लोगिंग की कोर कमेटी मे बात कर करके निषेध आज्ञा लगवा दे ताकि भविष्य उज्वल रहे और निरंतर लिखते रहे ताकि आप के मन सही उदगार खुल कर सामने आये ।

Anonymous said...

हिंदी ब्लोगिंग करने वालो में ज्यादा की औसत उम्र ४० से ऊपर है ,पर अफ़सोस फिर भी यहाँ भी हिंदी अखबारों हिंदी चैनल की तरह कचरा ज्यादा है .पहेलिया ,या एक दूसरे का साक्षात्कार ,वाह -वाह,भाई बंधू - वाद अच्छी शक्ल वाली की बेहूदा कविताओ पे वाह वाह..मिसाल के तौर पे एक बेबी साहिबा को ही देख लीजिये ,उनकी सारी कविताएं दरअसल एस एम् एस ओर इ मेल है ,बड़े बड़े जाकर वहां वाह वाह कर आये है .

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हिन्दी ब्लागिंग का भविष्य सचमुच बहुत उज्जवल है.)

Rachna Singh said...

क्युकी किसी और ने प्रश्न नहीं किया सो अपना कमेन्ट जो चर्चा पर दिया हैं यहाँ प्सोत कर रही हूँ ताकि इस पोस्ट के लेख को भी जाहिलता और हँसी ठिठोली का अन्तर स्पष्ट हो सके । चर्चा पर आया गौतम ऋषि का कमेन्ट पढ़ ले आप को वो भी दीखे गा जो लोगो को दीखता http://chitthacharcha.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html?showComment=1242723960000#c1785220229841325063
मै अपनी असलियत अपने हाथ मे ले कर चलती हूँ । मै मोटी हूँ या दुबली हूँ इस बात का ब्लोगिंग से क्या लेना देना । " आप इसकी चिंता में और दुबली मत होईये" मे गौर करने लायक शब्द हैं "और " यानी डॉ अरविन्द सरीखे विद्वान भी मुहावरे को नहीं व्यक्तिगत टिप्पणी लिख रहे हैं । मुहावरा हैं काजी जी क्यूँ दुबले शहर के अंदेशे से अगर ये लिखा जाए तो व्यंग मे भी चलता हैं पर " और दुबली कहना " केवल और केवल ये दिखाता हैं की डॉ अरविन्द के अनुसार मे "दुबली " हूँ तथा बेकार का चिंतन कर के "और दुबली ना हो जायूं " । जिन लोगो ने महान विद्वान डॉ अरविन्द का "और " उस कैमेंट मे ना देखा हो देख ले ।
मै नेट पर सम्बन्ध बनाने की इच्छुक नहीं हूँ हर किसी से इसलिये निजता पर किये हुआ कमेन्ट को जवाब देना जरुरी हैं ताकि कल कोई और विद्वान ना स्नेह की वर्षा करने लग जाए
सादर
रचना